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सहवाग ने किया भारत का पलड़ा भारी

सहवाग ने किया भारत का पलड़ा भारी

अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से मंत्रमुग्ध करने वाले वीरेंद्र सहवाग ने गुरुवार को शतक जड़ने के बाद अपनी आफ स्पिन के जादू से श्रीलंका की सलामी जोड़ी को पवेलियन भेजकर तीसरे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच में भारत का पलड़ा भारी कर दिया।

सहवाग ने सुबह अपना 21वां टेस्ट शतक जमाया और 109 रन की पारी खेली तथा बाद में छह गेंद के अंदर दो विकेट लेकर श्रीलंका को इस सीरीज में पहली बार बैकफुट पर भेजा। सहवाग के शतक, वीवीएस लक्ष्मण (56) और सुरेश रैना के अर्धशतक तथा पुछल्ले बल्लेबाज अभिमन्यु मिथुन (46) और अमित मिश्रा (40) की साहसिक पारियों से भारत अपनी पहली पारी में 436 रन बनाकर 11 रन की बढ़त हासिल करने में सफल रहा।

पहली पारी में 425 रन बनाने वाले श्रीलंका ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 45 रन बनाए हैं और इस तरह से उसे अभी 34 रन की बढ़त हासिल है। कप्तान कुमार संगकारा 12 रन पर खेल रहे हैं जबकि नाइटवाचमैन सूरज रणदीव को अभी खाता खोलना है। भारत की तरफ से सहवाग ने चार ओवर में 11 रन देकर दो विकेट लिए हैं।

सहवाग ने शतक जड़ने के बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया और जब भारतीय तेज गेंदबाज श्रीलंकाई सलामी जोड़ी पर प्रभाव डालने में असफल रहे तब उन्होंने अपने पहले ओवर में ही तरंगा परानविताना (16) को आउट किया। सहवाग की आफ स्टंप से टर्न लेती गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों में समा गई। परानविताना को इससे पहले मुरली विजय ने जीवनदान दिया था।

सहवाग के अगले ओवर में तिलकरत्ने दिलशान (13) रन आउट होने से बचे लेकिन अगली गेंद फिर से तेजी से अंदर की तरफ घूमी जिस पर श्रीलंकाई बल्लेबाज ने एलबीडब्ल्यू होने से बचने के लिए बल्ला भिड़ा दिया और इस बार शार्ट लेग पर खड़े विजय ने डाइव लगाकर बेहतरीन कैच लिया।

इससे पहले सचिन तेंदुलकर (41) और सहवाग ने श्रीलंका को अपने विकेट इनाम में दिए लेकिन लक्ष्मण और रैना ने पांचवें विकेट के लिए 105 रन की साझेदारी करके स्थिति संभाली जबकि मिथुन और मिश्रा की आठवें की 64 रन की साझेदारी ने रही सही कसर पूरी कर दी।

तेंदुलकर ने सुबह 40 रन से अपनी पारी आगे बढ़ाई लेकिन लेसिथ मालिंगा के दिन के पहले ओवर में ही उन्होंने आफ स्टंप से बहुत बाहर जाती गेंद पर कदमों का इस्तेमाल किए बिना छेड़खानी करने की कोशिश में विकेटकीपर प्रसन्ना जयवर्धने को आसान कैच थमाया। सहवाग ने 97 रन से आगे खेलते हुए मालिंगा की गेंद पर चौका जड़कर अपना शतक पूरा किया लेकिन जल्द ही उन्होंने रणदीव की गेंद पर मिड आफ पर आसान कैच देकर अपना विकेट गंवाया। उन्होंने 105 गेंद खेली और 19 चौके लगाए।

भारत का स्कोर तब चार विकेट पर 199 रन था। लक्ष्मण और रैना ने दबाव की इन परिस्थितियों में क्रीज पर पांव जमाने में समय लगाया। लक्ष्मण शुरू में रणदीव पर हावी रहे जिनके एक ओवर में उन्होंने दो बार गेंद सीमा रेखा पार भेजी। रैना ने आत्मविश्वास हासिल करने के बाद मेंडिस पर स्क्वायर और बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर चौके जमाए।

लक्ष्मण ने मालिंगा पर थर्ड मैन क्षेत्र में चौका लगाकर अपना 45वां अर्धशतक पूरा किया लेकिन फिर से वह मेंडिस के शिकार बने। मेंडिस की राउंड द विकेट से की गई कैरम बाल पर लक्ष्मण गच्चा खा गए और उन्होंने महेला जयवर्धने को स्लिप में कैच दे दिया। यह सातवां अवसर है जबकि मेंडिस ने इस हैदराबादी बल्लेबाज को आउट किया।

मेंडिस ने इसके कुछ देर बाद फिर अपनी कैरम बाल का कमाल दिखाया और इस बार आफ स्टंप से अंदर आती उनकी गेंद पर रैना ने शार्ट मिटविकेट पर कैच थमाया। कप्तान धोनी (15) भी अधिक देर तक क्रीज पर नहीं टिक पाए और मालिंगा के बाउंसर पर जवाबी हमला करने के प्रयास में विकेटकीपर को कैच देकर पवेलियन लौटे।

जब धोनी आउट हुए तो भारत का स्कोर सात विकेट पर 350 रन था, लेकिन मिथुन और मिश्रा ने मालिंगा की कुछ बाउंसर और फुललेंथ गेंदों का डटकर सामना किया। मिथुन ने चनाका वेलेगेदारा और मेंडिस की गेंदों पर चौके जमाए। मिश्रा हालांकि भाग्यशाली रहे और मालिंगा की गेंद पर शुरू में ही एंजेलो मैथ्यूज ने उनका आसान कैच छोड़ा।

इस दौरे में बल्ले से लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले मिथुन जब अपने पहले अर्धशतक के बेहद करीब थे तब रणदीव की तेजी से स्पिन लेती गेंद उनके दस्तानों को चूमती हुई लेग स्लिप में खड़े महेला जयवर्धने के पास चली गई जिन्होंने दूसरे प्रयास में उसे कैच में तब्दील किया। मिथुन ने 77 गेंद की पारी में पांच चौके लगाए।

रणदीव ने इसके कुछ देर बाद मिश्रा और ईशांत शर्मा (8) को आउट करके भारतीय पारी का अंत किया। मिश्रा ने 66 गेंद खेली तथा चार चौके लगाए।

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