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कलमाड़ी के सहयोगी दरबारी और महिन्द्रू निलंबित

कलमाड़ी के सहयोगी दरबारी और महिन्द्रू निलंबित

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अपने संयुक्त महानिदेशक टीएस दरबारी और उपमहानिदेशक डा संजय महिन्द्रू को गुरुवार को निलंबित कर दिया और इसके साथ ही आस्ट्रेलियाई कंपनी स्पोर्ट्स मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट (एसएमएएम) के साथ करार रद्द कर दिया है।

आयोजन समिति के कार्यकारी बोर्ड की आपात बैठक के बाद समिति के महासचिव ललित भनोट ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दरबारी और महिन्द्रू को निलंबित कर दिया गया है और उनसे संबद्ध मामले को जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिया गया है। निदेशालय की जांच पूरी होने तक ये दोनों अधिकारी निलंबित रहेंगे।

भनोट ने कहा कि इसके साथ ही वित्त एवं लेखा विभाग के संयुक्त महानिदेशक एम जयचंद्रन को भी निलंबित कर दिया गया है लेकिन उनके मामले की कल सुनवाई के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा। खेल मंत्रालय ने आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को हाल ही में एक पत्र लिखकर दरबारी और महिन्द्रू को उनके पद से हटाने को कहा था। इन दोनों अधिकारियों का नाम गत 29 अक्टूबर को लंदन में हुए क्वींस बेटन रिले समारोह की आयोजक ब्रिटिश कंपनी को भुगतान में हुए कथित वित्तीय हेरफेर के मामले में उछला था। दरबारी के खिलाफ केरल में सीमाशुल्क से संबंधित एक मामले की भी जांच चल रही है।

हालांकि प्रेस कांफ्रेस में कलमाड़ी के आने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन लगातार तीसरे दिन आयोजन समिति मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करने भनोट पहुंचे जिसे लेकर यह सवाल भी पूछा गया कि क्या कलमाड़ी इस मामले को लेकर मीडिया के सामने आने से कतरा रहे हैं और अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

आयोजन समिति के अध्यक्ष कलमाड़ी ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए मंगलवार को तीन सदस्यीय एक समिति गठित की थी। समिति में आयोजन समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह, विशेष महानिदेशक (वित्त) जीसी चतुर्वेदी और मुख्य सतर्कता अधिकारी गुरज्योत कौर शामिल हैं।

भनोट ने बताया कि समिति के पास अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 48 घंटे से भी कम का समय था। समिति ने कार्यकारी बोर्ड को आज अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसके बाद बोर्ड ने दरबारी और महिन्द्रू को निलंबित करने का फैसला किया और इसके साथ ही इस मामले की आगे की जांच के लिए इसे प्रवर्तन निदेशालय को भी सौंप दिया गया।

उन्होंने कहा कि कार्यकारी बोर्ड को लगता है कि इस मामले में अभी और जांच किए जाने की जरूरत है और प्रवर्तन निदेशालय इस काम को बखूबी कर सकता है। ये दोनों अधिकारी प्रवर्तन निदेशालय की जांच पूरी होने तक निलंबित रहेंगे। भनोट ने साथ ही बताया कि एक अन्य अधिकारी एम जयचंद्रन को भी इस मामले में निलंबित कर दिया गया है। हालांकि जयचंद्रन ने खुद को निर्दोष बताया है इसलिए उनके मामले की कल सुनवाई होगी लेकिन तब तक वह भी निलंबित रहेंगे।

इससे पहले राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष और भारतीय टेनिस लॉबी के सबसे प्रभावशाली प्रशासक अनिल खन्ना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खन्ना अखिल भारतीय टेनिस संघ के सचिव हैं। उनकी जगह पर एके मट्टू को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।

खन्ना पर अपने बेटे आदित्य की कंपनी रीबाउंड एस को दिल्ली लॉन टेनिस परिसर में स्थित आर. के. खन्ना स्टेडियम में सिंथेटिक टर्फ बिछाने का ठेका दिलाने का आरोप है। खन्ना ने कहा है कि वह नैतिक आधार पर अपना पद छोड़ रहे हैं लेकिन बेटे की कंपनी को टर्फ बिछाने का ठेका दिलाने में उनका कोई हाथ नहीं है।

खन्ना के बेटे आदित्य रीबाउंड एस की भारतीय इकाई में मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि आदित्य की कंपनी ने डीएलटीए परिसर में जो 14 टर्फ लगाए हैं, उनमें भारी कमियां हैं। आर. के. खन्ना स्टेडियम में ही राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान टेनिस स्पर्धाओं का आयोजन होना है।

एक भारतीय समाचार पत्र ने गुरुवार को खुलासा किया है कि आस्ट्रेलियन ओपन के आयोजकों ने जिस टर्फ को बेकार करार देकर नकार दिया था, उसे भारत लाकर डीएलटीए परिसर में लगाया गया है।

खन्ना ने गुरुवार को अपने इस्तीफे के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में तमाम आरोपों से इंकार किया और कहा कि उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है क्योंकि वह नहीं चाहते कि उनके कारण उनके बेटे के पद पर कोई आंच आए।

खन्ना का इस्तीफा ओसी के लिए बड़ा झटका है क्योंकि गुरुवार को ही उसे अपने ऊपर लगे अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को लेकर सफाई देनी है।

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