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सोहराबुद्दीन मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी की पेशी

सोहराबुद्दीन मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी की पेशी

गुजरात सीआईडी के प्रमुख के पद पर रहते हुए सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ओपी माथुर पूछताछ के लिए गुरुवार को सीबीआई के समक्ष पेश हुए।

फिलहाल गुजरात सरकार के रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के प्रभारी के पद पर नियुक्त माथुर से गांधीनगर स्थित सीबीआई के कार्यालय में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी ने उन्हें 27 जुलाई को तलब किया था। हालांकि, वह निजी कारणों के चलते पेश होने में नाकाम रहे थे।

गौरतलब है कि माथुर उस राज्य सीआईडी के प्रमुख थे, जिसने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामला और नवंबर 2005 में उसकी पत्नी कौसरबी की कथित हत्या की जांच की थी। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में इस जांच कार्य को सीबीआई को सौंप दिया था।

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस मामले में वह माथुर से महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने में सक्षम होंगे। माथुर को इससे पहले सीबीआई ने मई में तलब किया था लेकिन उस वक्त उनका बयान दर्ज नहीं किया गया था।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक अन्य सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जीसी रैगर का बयान पहले ही दर्ज कर लिया है, उन्होंने भी इस मुठभेड़ की जांच के दौरान राज्य सीआईडी का नेतृत्व किया था। उन्हें गवाह के रूप में तलब किया गया था।

सीबीआई ने इस मामले की पूर्व जांच अधिकारी गीता जौहरी को भी तलब किया है, जिन्हें 10 अगस्त को जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। केंद्रीय एजेंसी ने गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह को आपराधिक साजिश रचने, हत्या, अपहरण और जबरन धन वसूली के आरोप में 25 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद आईपीएस अधिकारी अभय चुड़ासामा को भी गिरफ्तार किया था, जो इस मामले में एक मुख्य साजिशकर्ता है। जांच एजेंसी ने रजनीश राय का बयान भी दर्ज किया, जिन्होंने तीन आईपीएस अधिकारियों डीजी वंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन को गिरफ्तार किया था। इन्हें मुठभेड़ का मुख्य साजिशकर्ता माना गया है।

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