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जादू की अनोखी दुनिया

जादू की अनोखी दुनिया

हैरी पॉटर का नाम सुनते ही तुम्हें जादुई दुनिया की याद आ जाती है। बच्चों के अलावा बड़े भी उसकी किताबों व फिल्मों में रुचि दिखाते हैं। दरअसल हैरी पॉटर की जादुई शक्ति अपनी ओर खींचती है। तुमने कभी अपने सामने तो कभी फिल्मों में बहुत मैजिक शो देखे होंगे। मन में यह सवाल बार-बार उठता रहता है कि आखिर जादूगर अंकल ने कैसे उस व्यक्ति को आसमान में उछाल दिया। क्या उस छड़ी में कुछ जादूई शाक्ति थी। ऐसे ही ढेर सारे सवालों के उत्तर व कुछ प्रमुख जादूगरों से तुम्हारी मुलाकात करवा रही हैं सुषमा कुमारी।

तुमने सुना ही होगा कि कुछ समय पहले तक कोलकाता जादू की नगरी के रूप में जाना जाता था, इसलिए जादू का सारा सामान भी वहीं मिलता था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज हर जगह से मैजिशियन आ रहे हैं और हर जगह इसका सामान भी मिल रहा है। राजा-महाराजा के उस दौर में उन्हें खुश करने के लिए जादू को एक आर्ट के रूप में पेश किया जाता था। धीरे-धीरे जब राजशाही खत्म होने लगी तो जादूगर कंगाली की कगार पर आ गए और सड़कों पर मदारी बन गए। बाद में जब पढ़ने-लिखने लगे तो इस कला को एक बार फिर पहचान मिलने लगी।

क्या है जादू?

भारत व चीन से चलकर आया जादू का यह सफर अब काफी फल-फूल रहा है। देश-विदेश में, हर जगह जादूगरों को सम्मान और पैसा दोनों ही मिल रहा है। यह एक रियल मैजिक है, कोई जादू-टोना या टोटका नहीं है। जादू न तो हाथों की सफाई है और न ही आंखों का धोखा, दिमाग की चतुराई है यह। जादूगरों के हाथ हमारी-आपकी नजरों और दिमाग से कहीं ज्यादा तेजी से काम करते हैं। इसलिए हम उसे अच्छी तरह समझ नहीं पाते और जादू सा लगता है।

कैसे हुई जादू की शुरुआत

जब कोई चीज इंसान को समझ नहीं आती तो वह उसे जादू मान लेता है या फिर भगवान। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो अपने-अपने क्षेत्र में जो भी सर्वश्रेष्ठ है, उसके अंदर जादू है और वह जादूगर। जैसे- सचिन के बल्ले में, लता की आवाज में और रहमान के संगीत में है जादू। अंग्रेजी के शब्दों से भी ‘मैजिक’ का अर्थ समझा जा सकता है। एम से मिस्ट्री, ए से एम्यूजमेंट, जी से ग्लोरी, आई से इल्यूजन और सी से चेलेंज।

दुनिया की मशहूर जादुई हस्तियां

डेविड कॉपरफील्ड- 10 साल की उम्र से ही जादू दिखाना शुरू कर देने वाले कॉपरफील्ड का जन्म यूएसए के न्यू जर्सी में हुआ। महज 16 साल की उम्र में ही न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में उन्हें मैजिक का कोर्स कराने का मौका मिल गया। अब तक 11 बार ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में वह अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

हैरी हुडनी- सन् 1874 में जन्मे हुडनी को मूलत: स्टंट परफॉर्मर के तौर पर जाना जाता था। हंगरी-अमेरिका में जन्मे हुडनी ने 52 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।

शिमाडा- दुनियाभर में एलिगेंट, क्लासिक और ऑरिजिनल परफॉर्मर के तौर पर खुद को साबित कर चुके जापान के शिमाडा ने अपना नाम ऑल टाइम सक्सेसफुल मैजिशियन के रूप में अंकित कर लिया है।

ब्लैक स्टोन- साल 1885 में यूएसए के मिसिगन में जन्मे ब्लैक स्टोन, सीनियर ने 20वीं सदी में ही स्टेज मैजिशियन के रूप में जादू की दुनिया में अपना नाम कर लिया था। 80 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया से विदा ली।

पी.सी. सरकार- 50-60 के दशक में अपने प्रसिद्ध शो ‘इंद्रजाल’ के माध्यम से दुनिया भर के लोगों का दिल जीतने वाले बंगाल के सरकार थे। सन् 1913 में बंगाल के जिस क्षेत्र में उनका जन्म हुआ था, अब वह बांग्लादेश में आता है। 1971 में 58 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

जादूगर ये भी कम नहीं

अशोक भंडारी जादू की दुनिया का जाना-पहचाना नाम हैं। उनका कहना है- जादू मनोरंजन का एक बेहतरीन जरिया है। हम अपनी इस कला को और भी मनोरंजक बनाने के लिए उसमें संगीत और रंगमंच का तड़का भी लगा देते हैं। वे इस कला के गलत इस्तेमाल करने वालों को बेपर्दा करना चाहते हैं। यही वजह है उनके हर शो के एक भाग में यह जरूर दिखाया जाता है कि जादू का इस्तेमाल करके लोगों को बेवकूफ बनाना कितना आसान है! अपने हाथों का कमाल दिखाकर जापान और रूस सहित यूरोप के लगभग सभी देशों में अब तक परफॉर्म कर चुके हैं। महज पांच साल की उम्र में नेहरू चाचा से पुरस्कृत भंडारी को 12 साल की उम्र में इंदिरा गांधी और तत्कालीन राष्ट्रपति ने भी सम्मानित किया था।

पारंपरिक भारतीय जादू की दुनिया में जादूगर राजकुमार का नाम सबसे पहले आता है। भरतनाट्यम और थिएटर जुगलबंदी के लिए मशहूर राजकुमार उत्तर भारत के पहले इंडियन बास्केट एक्ट परफॉर्मर और ‘इंडियन रोप ट्रिक’ शैली रिकॉर्ड होल्डर हैं। जादू सिखाने के लिए ‘दिल्ली स्कूल ऑफ मैजिक’ और युवाओं के बीच इसे पॉपुलर बनाने के लिए दिल्ली में इन्होंने पहला मैजिक शॉप ‘इल्यूजन, दि मैजिक शॉप’ भी खोला है। बंगाल के पी.सी. सरकार, गुजरात के ग्रेट क़े लाल, जबलपुर (मध्य प्रदेश) के आनंद, उत्तर प्रदेश के ओ़पी़ शर्मा की गिनती देश के महान जादूगरों में होती है।

चलो सीखते हैं जादू की एक ट्रिक..

यह जादू एक कार्ड पर गिलास बैलेंस करते हुए दिखाना है। तस्वीरों के जरिए मैजिशियन राजकुमार आपके लिए जादू की इस शैली का खुलासा कर रहे हैं।

सबसे पहले कार्ड को दो हिस्सों में लंबवत काट लो।

एक सामान्य ताश के कार्ड के पीछे इसके एक हिस्से को चिपका दो। आधे कटे कार्ड साबुत कार्ड के पीछे ऐसे चिपकाओ, जिससे देखने वाले को लगे कि हाथ में एक ही कार्ड है।

अब उसे पीछे की ओर छिपाकर रखो और उस पर गिलास को बैलेंस करके रख दो।

अब देखने में लगेगा कि एक सिंगल कार्ड पर गिलास बैलेंस हो गया है

नन्हे जादूगर यश का कमाल

तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में तुम्हारी ही उम्र का एक जादूगर रहता है। उसका नाम यश मुखीजा है। वह सिर्फ दस साल का है। मम्मी गीता मुखीजा बताती हैं कि दो साल की उम्र में जब बच्चे बोलना सीखते हैं, तभी से वह जादू सीख रहा है। ढाई साल की उम्र में उसने अपना पहला स्टेज शो किया था। बचपन से ही ब्लाइंड फोल्ड कर यश खेलना शुरू कर देता था। इस साल ब्लाइंड फोल्ड करके साइकिल से लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाकर ‘लिम्का बुक रिकॉर्ड होल्डर’ में उसने अपना नाम भी दर्ज कर लिया है। ब्लाइंड फोल्ड के बाद यश होमवर्क और गेम्स जैसे मुश्किल काम भी आसानी से कर लेता है। जादू की यह कला उसे अपने ननिहाल की ओर से विरासत में मिला है। कभी-कभी सिक्का गायब करके या पेन हवा में उछाल कर वह लोगों का मनोरंजन भी करता है। बड़ा होकर यश मैजिशियन और साइंटिस्ट दोनों बनना चाहता है। वह कहता है, ‘जितना प्यार मुझे जादू की दुनिया से है उतना ही साइंस से भी, इसलिए मैंने दोनों में से किसी भी एक को खुद से दूर नहीं कर सकता।’ दोस्तो, यश की मौसी संगीता कपूर हैं।

वे भी एक जादूगर हैं। बचपन में ही पिता हरि कृष्ण और मम्मी से जादू के गुर सीखना शुरू कर चुकीं संगीता मैजिक को साइंस और आर्ट्स दोनों मानती हैं। वह कहती हैं, ‘जादू नजरों का धोखा है। समझ आ जाए तो हाथों की सफाई है वरना ट्रिक।’

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