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अपने दांतों के बारे में जानिए

अपने दांतों के बारे में जानिए

दोस्तो,  आज तुम जानोगे कि तुम्हारे दूध के कौन-कौन से दांत तुम्हारे लिए कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोफेसर डॉ. अमूल्य चड्ढा के मुताबिक, हमारे दांत कैल्शियम से बने होते हैं। बच्चों के दूध के दांत तीन प्रकार के होते हैं। इन्हें प्राइमरी टीथ भी कहते हैं। शुरुआती सालों में बच्चों के केवल बीस ही दांत होते हैं। इनमें से आठ इनसीजर, चार केनाइज तथा आठ मोलर दांत होते हैं। अमूमन बच्चों के दूध के दांत सात से ग्यारह साल की उम्र में गिर जाते हैं। दूध के दांत गिरने के बाद ही परमानेंट अर्थात स्थायी दांत आते है। इन्हें सेकेंडरी टीथ भी कहते हैं। जब बच्चों वयस्क आदमी बन जाते हैं तो फिर उनके बत्तीस दांत निकलते हैं। ये बत्तीस दांत परमानेंट दांत होते हैं। इनमें आठ इनसीजर, चार केनाइज, आठ प्रीमोलर तथा बारह मोलर दांत होते हैं। इनमें चार दांत विजडम टीथ भी शामिल होते हैं, जिन्हें आम बोलचाल में अक्ल  दाढ़ भी कहते हैं।

बच्चों के आगे के ऊपर और नीचे के मिलाकर आठ दांत इनसीजर होते है, जबकि इनसीजर से ठीक आगे वाले चार दांत दोनों तरफ के एक एक दांत, ऊपर तथा नीचे का मिलाकर केनाइज होते हैं, जबकि आगे के चार दांत, दोनों तरफ के दो दो दांत, ऊपर और नीचे को मिलाकर मोलर दांत होते हैं।

इनसीजर दांतों का काम खाने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटना होता है, जबकि केनाइज तेज और नुकीले होने के कारण नॉन वेज जैसे खाने को फाड़ने के काम में आते हैं। दूसरी तरफ मोलर दांत बेहतर पाचन के लिए खाने को पीसने का काम करते है। वहीं वयस्कों में प्रीमोलर दांत खाने के टुकड़ों को चबाने का काम करते हैं। इसीलिए बच्चों को अपने दूध के दांत जितना हो सके संभाल कर रखने चाहिए । 

(इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के डेंटल सलाहकार एवं मेक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. अमूल्य चड्ढा से बातचीत पर आधारित)

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