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टच स्क्रीन का बढ़ता क्रेज

कुछ समय पहले तक कुछ लोगों के हाथों में दिखाई देने वाले टच-स्क्रीन मोबाइल फोन का बाजार अब काफी विस्तृत हो चुका है। विशेषज्ञों की मानें तो इस वर्ष टच-स्क्रीन फोन पर हर खरीदार की नजर होगी।

युवाओं का टचस्क्रीन के प्रति क्रेज देखते ही बनता है। बाजार विशेषज्ञ भी निकट भविष्य में इनका व्यापक चलन देखते हैं। यह कम कीमत में सब जगह उपलब्ध हैं। आंकड़ों की मानें तो इस वर्ष के जनवरी-मार्च में आठ लाख इकाइयों की संख्या वित्तीय वर्ष 2011 के पहली तिमाही में 15 लाख तक पहुंच चुकी है।

हाल में सैमसंग और एलजी ने दस हजार रुपये से कम में अपने कॉर्बी और कुकी की रेंज पेश की है। कारबॉन और फ्लाई कंपनियां भी पांच हजार की रेंज में टच स्क्रीन हेंडसेट पेश कर रहे हैं। यहां तक कि अब टच स्क्रीन एक उच्च आधुनिक तकनीक नहीं है, बल्कि एक ऐसा फीचर बन गया है जो कि अब मध्य रेंज के मोबाइल हेंडसेट में भी कंपनियां लगातार उपलब्ध कराने की कोशिशों में लगी है। यही कारण है कि ग्राहकों की टच स्क्रीन के प्रति बढ़ती मांग के कारण सभी बड़ी मोबाइल कंपनियां अपने मोबाइल हेंडसेट की रेंज में टच स्क्रीन के विकल्प भी पेश कर रही हैं।

कुछ कंपनियों पर गौर करें तो फिलहाल बाजार में सेमसंग के 20 टच स्क्रीन तकनीक आधारित फोन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिसमें से छह फोन वर्ष 2010 में ही लॉन्च किए गए हैं। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार सेमसंग की कुल मोबाइल बिक्री में 14 प्रतिशत हिस्सा टच स्क्रीन वाले फोन का है। हाल में कंपनी ने फ्रेश और प्लस कुकी लाइन पेश की है।

अब मोबाइल बाजार में आधे से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली नोकिया की बात करें तो उसके खाते में भी दस हजार रुपये से कम के कुछ हेंडसेट मौजूद हैं जिसमें पापुलर 5230 नोकिया हेंडसेट भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2012 तक टच सेंसेटिव तकनीक वाले हेंडसेट की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।

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