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नेटबुक

नेटबुक को आधुनिक टैक्नोलॉजी का शानदार नमूना कह सकते हैं। नेटबुक दिखने में बिल्कुल लैपटॉप की तरह होता है, मगर इसका आकार और भार लैपटॉप से काफी कम होता है। नेटबुक लैपटॉप से छोटा और पोर्टेबल होता है, इसलिए इसे मिनी-कम्प्यूटर भी कहा जाता है। इसका प्रयोग मुख्यत: बिना तार के संचार और इंटरनेट से जुड़ने के लिए किया जाता है।

नेटबुक को कागज और पेन का इलैक्ट्रोनिक रूप भी कह सकते हैं। इसलिए वर्तमान समय में यह विद्यार्थियों के लिए एक जरूरी मशीन बन गया है। दरअसल, नेटबुक का मॉडल सबसे पहले 1990 में नेटवर्क कम्प्यूटर ने बनाया था। इसके कुछ समय बाद टैक्नोलॉजी कम्पनी एपल ने ई-मेट 300 नाम से नेटबुक को सब-कॉम्पैक्ट लैपटॉप की तरह बाजार में उतारा।

इसके बाद बहुत से मॉडल बनाए गए और धीरे-धीरे नेटबुक का आकार और भार कम होते चले गए और 2009 के अंत तक 1.4 किलोग्राम वाला 23 सेंटीमीटर स्क्रीन का नेटबुक लैपटॉप बाजार में आया। नेटबुक में ऑप्टिकल ड्राइव नहीं होती पर इसमें दो से तीन यूएसबी का पोर्ट होता है। इसके अलावा, हर नेटबुक में फ्लैश रैम मेमोरी कार्ड और हेडफोन और माइक्रोफोन जैक होता है।

नेटबुक में हर विद्यार्थी को सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण फीचर्स हैं :
वेब 2.0 सुविधा, लैपटॉप से हल्का और बड़ी स्क्रीन, ऑनलाइन टैक्स्टबुक और असाइन्मेंट सबमिशन, पर्सनल क्लास शेड्यूल अपडेशन, क्लाउड कम्प्यूटिंग के साथ सहयोग।

लैपटॉप के मुकाबले 5 से 28 प्रतिशत तक छोटे कीबोर्ड नेटबुक की मदद से कहीं और किसी भी जगह नोट्स लिए जा सकते हैं। इसलिए नेटबुक स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए नोट बुक और पेन का काम करती है।
छात्रों के अलावा लेखक और व्यवसायी भी कागजी काम के लिए फाइलों की बजाए नेटबुक पसंद करते हैं क्योंकि इसमें फाइलों के गुम होने की समस्या नहीं होती।

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