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गेट्रर नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ फोरम का फैसला

उपभोक्ता फोरम ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को अधिक पैस लेने का दोषी पाते हुए उसे साठ दिन के अंदर वापस करने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि परिवादी आदेश की तिथि से वापस लेने वाली रकम पर छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी पाने का हकदार है।


फोरम से मिली जानकारी के अनुसार मेसर्स हसन डेवलपर्स ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से 25 नवंबर 2004 को पांच हजार वर्ग मीटर औद्योगिक प्लाट के आवंटन हेतु आवेदन किया। आठ फरवरी 2005 को मेसर्स हसन अपने सभी कागजात लेकर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पहुंचा और इस पर अथॉरिटी ने कहा उसे शीघ्र ही आवंटन पत्र  भेज दिया जाएगा। 21 फरवरी 2005 को मेसर्स के पास अथॉरिटी की ओर से एक पत्र आया जिसमें बताया गया था कि आपको पांच हजार वर्ग मीटर का औद्योगिक भूखंड संख्या-28 ए सेक्टर-31 गेट्रर नोएडा में 943 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से आवंटित किया गया है। उसे अथॉरिटी ने 47,1500 रुपए में दिया। इस पर मेसर्स ने 3,91,500 रुपए अथॉरिटी में जमा कर दिया। बाद में वह कई चक्कर अथॉरिटी का चक्कर लगाता रहा लेकिन उसे अपने प्लाट का कब्जा नहीं मिला। अथॉरिटी ने 11 मई 2007 को पत्र द्वारा सूचित किया कि उसका प्लाट पांच के स्थान पर चार हजार वर्ग मीटर कर दिया। इस पर मेसर्स ने कहा कि इस प्लाट पर वह अपनी फैक्टरी नहीं बना सकता है। लेकिन अथॉरिटी ने सीधे मना कर दिया है कि इससे अधिक का प्लाट नहीं दिया जा सकता है। आखिरकार मेसर्स ने चार हजार वर्ग मीटर का प्लाट लेना ही स्वीकार कर लिया। लेकिन अथॉरिटी ने कहा कि अब भूखंड का रेट बढ़ चुका है इसलिए वह नए रेट से और पैसा अथॉरिटी को दे। इस पर मेसर्स फोरम में चला गया। और फोरम ने आदेश मसर्स के पक्ष में फैसला सुनाया।

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  • Web Title:ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ फोरम का फैसला