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हरी सब्जियों पर पड़ी मौसम की मार

हरी सब्जियों के दामों पर मौसम की मार का असर पड़ रहा है। मंडियों में सब्जियों की आवक घटने-बढ़ने से दामों में उतार-चढ़ाव आ रहा है। कुछ दिन सस्ती रहने के बाद हरी सब्जियां एक बार फिर महंगी हो गई हैं। सबसे ज्यादा असर टमाटर व गोभी के दामों पर पड़ रहा है। कुछ दिन पहले लौकी इतनी सस्ती हो गई कि साहिबाबाद मंडी में उसे खरीददार नहीं मिलने पर उसे फिकवाना पड़ा। अब कांवड़ यात्रा के दौरान भी सब्जियां महंगी हो जाएंगी।


हरी सब्जियों पर भी फिर से महंगाई की मार पड़ गई है। मंडियों में सब्जियों के बढ़े दाम सुनकर लोग चौंक रहे हैं। क्योंकि चार दिन पहले तक लोगों को इन्हीं सब्जियों के कम दाम चुकाने पड़ रहे थे। हरेक सब्जी के दामों में उतार-चढ़ाव आ रहा है। कुछ दिन पहले 20 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर अब 40 रुपए किलो बिक रहा है। इसी तरह से गोभी भी 60 रुपए किलो तक पहुंच गई है। सब्जी विक्रेता इसके लिए मौसम को जिम्मेदार बता रहे हैं। जटवाड़ा मंडी के सब्जी विक्रेता ऋषिपाल का कहना है कि बारिश होने से कुछ सब्जी किसानों के खेतों में ही पड़ी रह जाती है तो कुछ फसल नष्ट हो जा रही है। इससे माल की आवक प्रभावित हो रही है और सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद साहिबाबाद के सचिव एसपी सिंह का कहना है कि पहले सूखे के कारण मंडियों में कम माल आ रहा था। अब बारिश के कारण माल की आवक घट-बढ़ रही है। जब माल ज्यादा आ जाता है तो दाम गिर जाते हैं और सब्जियों की आवक घटते ही दाम कम हो जाते हैं। माल ज्यादा आने से कुछ दिन पहले लौकी इतनी सस्ती हो गई कि उसे फिकवाना पड़ा था। अब कांवड़ यात्रा में भारी वाहन बंद होते ही माल की आवक प्रभावित होगी। इसका असर भी हरी सब्जियों के दामों पर पड़ेगा।

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