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धर्म के मर्म को आत्मसात करें: नरेन्द्र गिरी

इलाहाबाद के बाघम्बरी पीठाधीश्वर महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा है कि जीवन का चरम लक्ष्य आत्म साक्षात्कार और परमात्मा की प्राप्ति है और इसके लिए व्यक्ति को सदैव सजग और तत्पर रहना चाहिए।


पीठाधीश्वर ने कल राजस्थान में बांसवाड़ा जिले के निरंजनी अखाड़ा क्षीरेश्वर धाम में संत समागम में ये उगार व्यक्त किए। समारोह में महंत लक्ष्मीगिरी,  अम्बाजी गुजरात,  महंत अम्बिकापुरी, हरिद्वार,  महंत जगदीश गिरी,  गुजरात, महंत सूरज गिरी महाराज, उदयपुर, महंत केशव गिरी, उज्जैन, रोहित पुरी महाराज, बाबा सत्यनारायण भारती सहित कई संत महात्माओं ने अपने विचार रखे।

 महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि धर्म के मूल रहस्यों को आत्मसात करने की महती आवश्यकता है। इसके लिए धर्म के दस लक्षणों को जीवन में अंगीकार करना होगा। व्यक्ति को निष्काम सेवा के कर्मयोग को अपनाना चाहिए और जीवन भर लोक सेवा के किसी न किसी प्रकल्प से जुड़ा रहना चाहिए।

क्षीरेश्वर धाम के महंत हरगोविन्द पुरी ने धर्म के मूल मर्म को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि चिंतन और सत्संग आदि के माध्यम से ईश्वर को पाया जा सकता है।

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