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इस साल मस्तिष्क ज्वर का खतरा बढ़ा लोग दहशत में

उत्तर प्रदेश में समय पर मस्तिष्क ज्वर के टीके नहीं पहुंच पाने और पहुंचे टीकों की मियाद खत्म हो जाने के कारण करीब तीन दशकों में हजारों लोगों को निगल चुकी इस जानलेवा बीमारी के एक बार फिर पांव पसारने की आशंका राज्य के लोग दहशत में हैं।
 
खासतौर से बच्चों को होने वाली इस बीमारी से इस साल एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। मौत का यह गोरखपुर स्थित आंकड़ा सरकारी बाबा राघवदास मेडिकल कालेज अस्पताल का है। बिना इलाज और गैर सरकारी अस्पतालों में मरे बच्चों की संख्या की कोई गिनती नहीं है। मरने से बच गए इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे शारीरिक या मानसिक विकलांगता के शिकार हो जाते हैं।

मानसून की पहली बारिश के साथ ही इस बीमारी से पीडि़त मरीजों की संख्या बढने की चिंता स्वास्थ्य विभाग को भी सताने लगी है। पिछले तीन दशक में इस बीमारी से हजारों बच्चों मर चुके हैं। इसके बावजूद मौत का ग्राफ नझ्रन तो नीचे आया और न ही इलाज की पक्की व्यवस्था की गई। उस पर विडबना यह है कि दिमागी बुखार के सर्वाधिक मरीज भर्ती करने वाले बाबा राघवदास मेडिकल कालेज गोरखपुर के बजाय संजय गांधी आर्युविज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई)  लखनऊ को नोडल एजेन्सी बना दिया गया है। जहां दिमागी बुखार के दो प्रतिशत से अधिक मरीज नहीं पहुंचते हैं।

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