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बिहार के 28 जिले सूखाग्रस्त घोषित, राजनीति तेज

बिहार में 28 जलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इसे चुनावी वर्ष की घोषणा बता रहा है, तो कांग्रेस ने घोषित पैकेज को तत्काल किसानों तक पहुंचाए जाने की मांग की है।

इसके पूर्व मंगलवार की देर रात राज्य के 38 जिलों में से 28 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया, शेष 10 जिलों को स्थिति का आकलन करने तथा उसे सूखाग्रस्त घोषित करने का जिम्मा मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले आपदा प्रबंधन समिति को सौंप दिया गया।

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी ने बताया कि सूखग्रस्त घोषित 28 जिलों में गरीबों को मुफ्त अनाज दिया जाएगा। इसके अलावा फसल बीमा की अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी गई है। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त सूखाग्रस्त जिलों में कृषि ऋण, खेती के लिए उपयोग में लाए गए बिजली बिल और लगान की वसूली स्थगित कर दी गई है। गौरतलब है कि घोषित सूखाग्रस्त जिलों में सामान्य से 23 प्रतिशत से कम बारिश हुई है।

सूखाग्रस्त जिलो में गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल, नवादा, पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, मुंगेर, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बेगूसराय, भागलपुर, बांका, सीवान, सारण, मुजफ्फपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, समस्तीपुर और दरभंगा शामिल हैं।

इधर, राजद के महासचिव रामकृपाल यादव ने ने कहा कि यह चुनावी वर्ष की घोषणाओं के समान है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार 28 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती है। इस बहाने केन्द्र को लंबी-चौड़ी फेहरिस्त सौंपेगी और इसके बाद शुरू हो जायेगी केन्द्र और राज्य सरकार की राजनीति। इसके बाद किसान बेबस किसान मारे जाएंगे।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष महबूब अली कैसर ने कहा कि घोषित पैकेज किसानों तक तुरंत पहुंचना चाहिये। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि सरकार केवल घोषणाएं कर ही बैठ जाए। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी राज्य के 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था।

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