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केंद्र का पलटवार, महंगाई पर राज्यों ने कुछ नहीं किया

केंद्र का पलटवार, महंगाई पर राज्यों ने कुछ नहीं किया

महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष के हमले झेल रही केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [संप्रग] सरकार ने बुधवार को पलटवार करते हुये महंगाई का ठीकरा राज्यों के सिर फोड़ा दिया।

केंद्र ने कहा कि राज्यों को महंगाई को काबू में रखने के लिये जमाखोरी और मुनाफाखोरी रोकने की जितनी कोशिश करनी चाहिए थी वह नहीं की गयी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने महंगाई के मामले में केन्द्र सरकार को पूरी तरह संवेदनशील बताया और केंद्र द्वारा उठाए गए उन तमाम कदमों को गिना दिया जो कि महंगाई को रोकने के लिये उठाये गये। उन्होंने कहा कि इस मामले में केन्द्र और राज्य दोनों को मिलकर समस्या का मुकाबला करना होगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार करने सहित ठोस उपाय करने होंगे।

मुखर्जी लोकसभा में महंगाई के मुद्दे पर हुई चर्चा का जबाव दे रहे थे। विपक्ष की टोकाटाकी के बीच उन्होंने कहा, 'मैं गांव से आया हूं। मैंने 10वीं तक चिमनी में पढा़ई की है, पैदल चलकर स्कूल गया हूं, आज के हिसाब से यह दूरी प्रतिदिन 10 किलोमीटर रही होगी। मेरी संवेदनशीलता की हंसी मत उड़ाइये, यह कोई सामान्य वस्तु नहीं है।' दरअसल विपक्ष बार-बार सरकार पर महंगाई के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगा रहा था।

मुखर्जी ने कहा कि महंगाई से गरीबों को बचाये रखने के लिये केन्द्र ने राशन में बिकने वाले खाद्यान्नों के बिक्री मूल्य वर्ष 2002 से नहीं बढा़ये। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति जून महीने में 10.55 प्रतिशत रही है, जबकि 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 9.67 प्रतिशत पर आ गई। मुखर्जी ने मूल्यवृद्धि के लिये राज्यों को भी दोषी ठहराया।

उन्होंने कहा कि राज्यों के पास ही आवश्यक उपभोक्ता वस्तु अधिनियम कानून के तहत जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार हैं। आवश्यक सेवा रखरखाव कानून भी राज्यों को कई अधिकार देता है, लेकिन फिर भी मैं केवल उन्हें ही जिम्मेदार नहीं ठहराता हूं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा पर पलटवार करते हुये मुखर्जी ने कहा कि जब मैं और पेट्रोलियम मंत्री दोनों बैठे और मिट्टी तेल के दाम बढा़ने का फैसला किया, मैं गरीबों पर इससे पड़ने वाले बोझ को लेकर काफी संवेदनशील था।

लेकिन, तब क्या हुआ जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [राजग] सरकार सत्ता में थी और उसने मिट्टी तेल के दाम दो रुपये से बढा़कर 9 रुपये तक पहुंचा दिये। हमने तो इसे 9 रुपये बढा़कर 12 रुपये किया है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढा़ने के फैसले को उचित ठहराते हुये मुखर्जी ने कहा केवल शोरशराबा करते रहने से पेट्रोलियम स्रोतों का पता नहीं लगाया जा सकता। प्राथमिकता इस बात को लेकर भी होनी चाहिये कि उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। यही वजह रही कि सरकार को 2008-09 में तेल कंपनियों को 1,03,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी पड़ी ताकि उपभोक्ताओं को कम दाम पर ईंधन उपलब्ध हो सके।

मुखर्जी ने वस्तु एवं सेवा कर [जीएसटी] लागू करने में भी सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि कर सुधारों के इस महत्वपूर्ण कार्य के लिये संविधान संशोधन करना होगा। इससे मूल्यों के उतार-चढा़व को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने राज्यों को याद दिलाया कि पेट्रोलियम पदार्थों पर शुल्क एवं करों से उन्हें 34 प्रतिशत राजस्व मिलता है और 72,000 करोड़ रुपये उनके खजाने में पहुंचते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को उनकी लागत से कम दाम पर बिक्री से सरकार को तेल कंपनियों को भारी सब्सिडी देनी पड़ती है।

संसद में पेश अनुपूरक अनुदान मांगों में भी 14,000 करोड़ रुपये इन तेल कंपनियों की सब्सिडी के लिये रखे गये हैं। मुखर्जी ने डबल डिजिट मुद्रास्फीति के लिये उच्च आर्थिक वृद्धि को भी एक वजह बताया। उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक वृद्धि के साथ मुद्रास्फीतिक दबाव रहता है। उल्लेखनीय है कि सकल मुद्रास्फीति पिछले पांच महीने से लगातार दस प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है।

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