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कश्मीर में 54 दिनों से जारी है हिंसा का दौर

कश्मीर घाटी बीते 54 दिनों से हिंसा के गिरफ्त में है। यहां पथराव, गोलीबारी और आगजनी रोजमर्रा की घटनाएं हैं। हिंसा के इस मंजर से न सिर्फ सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि 45 लोगों को जान से भी हाथ धोना पड़ा है।

प्रशासन की पूरी कोशिश शांति बहाल करने और आम लोगों की जिंदगी को पटरी पर वापस लेने की है। अधिकारी लगातार श्रीनगर के कर्फ्यूग्रस्त इलाकों में लाउडस्पीकार से कर्फ्यू संबंधी ऐलान कर रहे हैं। लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि वे कर्फ्यू का पालन करें। अधिकारियों को उम्मीद है कि लोग उनके ऐलान के अनुरूप शांति बनाए रखेंगे।

घाटी में 11 जून से हिंसा का दौरा जारी है। तब से यहां के ज्यादातर इलाकों में दुकानें, शैक्षणिक संस्थान, बैंक, डाकघर, कारोबारी प्रतिष्ठान और सरकारी दफ्तर बंद रहे हैं।

हिंसा से रेल सेवाएं भी बाधित हो गई हैं। घाटी में तैनात कई रेलवे कर्मचारी उपद्रवियों से तंग आकर भाग खड़े हुए हैं। यहां कई रेलवे स्टेशनों को आग लगा दी गई। रेलवे विभाग ने अनिश्चितकाल के लिए घाटी में रेल सेवाएं निलंबित कर दी हैं।

बीते 30 जुलाई तक घाटी में कुल 17 लोग मारे गए थे। परंतु पिछले कुछ दिनों से हिंसा में तेजी आई है। पिछले पांच दिनों में 27 लोगों की मौत हो गई। ज्यादा लोगों की मौत सुरक्षाबलों के साथ झड़प में हुई है। घायलों की तादाद भी 180 हो चुकी है।

हिंसा को बढ़ाने में अलगववादियों की भूमिका अग्रणी रही है। हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े ने शनिवार तक बंद और प्रदर्शन का आह्वान कर रखा था। इस दौरान कई लोग मारे गए।

हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 20 अतिरिक्त कंपनियां भेजी हैं ताकि कानून एवं व्यवस्था कायम रखने में स्थानीय पुलिस की मदद की जा सके।

उधर, प्रशासन श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग को खुलवाने में सफल रहा है। इसे प्रदर्शनकारियों ने बंद कर रखा था। उप पुलिस महानिरीक्षक (दक्षिणी कश्मीर) शफकत अहमद वताली ने बताया, ''राजमार्ग पर यातायात बहाल हो गया है।''

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