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'बांग्लादेश और म्यामार से तस्करी करते हैं हथियार'

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित चार राज्यों में चरमपंथियों से निपटने के अभियानों के लिए एक एकीकृत कमान का गठन किया जायेगा। छत्तीसगढ़ में इस तरह की कमान पहले ही गठित हो चुकी है।

चिदंबरम ने राज्यसभा को बताया कि नक्सलवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित चार राज्यों छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उड़ीसा के मुख्यमंत्रियों ने नक्सली अभियानों के लिये एकीकृत कमान के गठन पर सहमति जतायी थी। इनमें से छत्तीसगढ़ में पहले ही इस तरह की कमान बनायी जा चुकी है।

उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान महेंद्र मोहन के सवाल के जवाब में कहा कि शेष राज्यों में भी जिस एकीकृत कमान का गठन होगा, उसके प्रमुख राज्य के मुख्य सचिव होंगे। कमान में पुलिस महानिदेशक, महानिरीक्षक [सीआरपीएफ], महानिरीक्षक [राज्य पुलिस, केंद्र के खुफिया ब्यूरो तथा राज्य पुलिस के खुफिया ब्यूरो के प्रतिनिधि और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल रहेंगे।

चिदंबरम ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या से मुख्य तौर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ही निपट रहा है। कुछ क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल और आईटीबीपी की तैनाती की गयी है। चिदंबरम ने कहा कि सीआरपीएफ पूर्ण रूप से प्रशिक्षित होती है। नक्सली क्षेत्रों में चल रहे अभियानों में शामिल किये जाने से पहले इस बल के कर्मियों को वन क्षेत्रों में सेना द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है।

चिदंबरम ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि माओवादियों के साथ सीआरपीएफ के मुकाबले ज्यादा आधुनिक हथियार हैं। नक्सलियों के पास देशी हथियार होते हैं। साथ ही, वह राज्य पुलिस पर हमला कर उनसे हथियार लूट लेते हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली लोगों से अवैध वसूली कर धन इकट्ठा करते हैं। ऐसे कोई सबूत नहीं हैं कि उन्हें विदेशों से आर्थिक मदद मिल रही है। बहरहाल, इस तरह के संकेत हैं कि वे बांग्लादेश और म्यामार की सीमा से तस्करी के जरिये हथियार हासिल करते हैं।

गृह मंत्री ने प्रकाश जावडे़कर के सवाल के जवाब में कहा कि तस्करी रोकने के लिये भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम जारी है। लेकिन म्यांमार से सटी सीमा पर वहां की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा करना मुश्किल है। चिदंबरम ने रामविलास पासवान के सवाल के जवाब में उच्च सदन को बताया कि नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिये जिस दो-आयामी नीति का अनुसरण किया जा रहा है, उसका पहला चरण विकास से ही जुड़ा है। राज्यों के पास केंद्र की विभिन्न योजनाओं के तहत विकास के लिये बड़ी राशि उपलब्ध है। हम राज्यों से अनुरोध करते हैं कि वे नक्सली क्षेत्रों में विकास योजनाओं का तेजी से कार्यान्वयन करें।

चिदंबरम ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिये योजना आयोग एकीकृत विकास कार्यक्रम तैयार कर रहा है। इसमें सड़क संपर्क, प्राथमिक स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल की उपलब्धता पर जोर दिया जायेगा।
 उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ हुई पिछली बैठक में मुख्यमंत्रियों ने कहा था कि वह विकास योजनाएं चलाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा तब तक नहीं हो सकता जब तक कि क्षेत्र तर्कसंगत रूप से सुरक्षित नहीं हों। मुख्यमंत्रियों की इस दलील को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने मणिशंकर अय्यर के सवाल के जवाब में कहा कि नक्सली क्षेत्रों के लिये समेकित कार्य योजना में सबसे ज्यादा प्रभावित 83 जिलों में से 35 जिलों में ध्यान दिया जाएगा, लेकिन इस योजना के दायरे के विस्तार की भी कोशिश की जाएगी। गृह मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्रियों के साथ हाल ही में हुई बैठक में केंद्र की ओर से कहा गया था कि राज्य सरकारें पंचायतों का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार करने के प्रावधान वाले अधिनियम [पेसा] को पुरजोर तरीके से लागू करें।

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