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मानो मन की बात

उसे उन्होंने अपनी टीम में शामिल कर लिया था, लेकिन वह कुछ उखड़ा-उखड़ा रहता था। कई बार उससे पूछने की कोशिश वह कर चुके थे। हर बार वह टाल जाता था। एक दिन उन्होंने उसे रोक कर पूछा। उसने कहा कि इस काम में उसका मन नहीं लगता।

डॉ. कैथरीन ब्रुक्स टैक्सास यूनिवर्सिटी में लिबरल आर्ट्स करियर सर्विसेज की डायरेक्टर हैं। वह अपने मन का काम करने की जोरदार वकालत करती हैं। उनका मानना है कि हर शख्स को अपनी पसंद का काम ढूंढ़ना चाहिए ताकि वह उस फील्ड में बेहतरीन काम कर सके और एक खुशनुमा जिंदगी की ओर बढ़ सके।

अपने मन का काम और खुशी में एक दिलचस्प रिश्ता है। हम जब मन मार कर काम करते हैं, तो खुशी मिलने का सवाल ही नहीं उठता। खुशी मिलने के लिए तो मन का दुरुस्त रहना बेहद जरूरी है। लेकिन मन का काम ढूंढ़ना बहुत आसान काम नहीं है। वह बेहद बीहड़ रास्ता है।

सबसे पहले तो हमें अपने भीतर का सफर तय कर जानना होता है कि आखिर हमारा मन चाहता क्या है? यह पता लगाना भी आसान काम नहीं है। फिर उसे मनचाहे काम की तलाश करनी होती है। फिर खुद को तैयार करना होता है। उसके लिए जबर्दस्त मेहनत की जरूरत होती है। इतनी तैयारी करनी होती है कि कोई हमें रिजेक्ट न कर सके।

एक मौका मिले और हमारी काबिलियत झंडे गाड़ दे। लेकिन अपने मन की चाहना पूरी करने के लिए एक किस्म का जुनून चाहिए होता है। वही जुनून हमें अपनी मंजिल की ओर ले जाता है। जुनून हो और मंजिल का पता हो, तो फिर क्या है? हमें कामयाबी मिलनी ही है। कामयाबी के मायने खुशी नहीं होती। वह खुशी हमें तब मिलती है, जब कामयाबी के साथ मन की चाहत भी पूरी होती है। तो अपने मन की बात मानिए न।

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