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जरदारी का ब्रिटेन दौरा

राजनय का कोई विकल्प नहीं है। दो देशों के संबंध टिकाऊ संवाद से ही अच्छे रह सकते हैं न कि तीव्र प्रतिक्रिया करने से। इसलिए यह जरूरी है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी अपने ब्रिटेन दौरे में कुछ साफ कहें और उस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करें जो हाल में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन ने अपनी टिप्पणी से किया है। निस्संदेह पाकिस्तान के राष्ट्रपति पर अपनी यात्रा रद्द करने का जबरदस्त दबाव रहा है। उनके खुफिया प्रमुख ने कैमरॉन की सख्त टिप्पणी के विरोध में अपनी ब्रिटेन यात्रा रद्द भी कर दी है। कैमरॉन ने कहा था कि आईएसआई इस इलाके और दुनिया के बाकी हिस्सों में आतंकवाद का निर्यात करती है। लेकिन यही मौका है जब नेतृत्व स्थितियों को संभालने का अपना कौशल दिखाए। पाकिस्तान आतंकवाद से जंग में अगली कतार में रहा है और उसे संदेह को दूर करने और आरोपों का जवाब देने का यह मौका चूकना नहीं चाहिए।
खलीज टाइम्स, दुबई

हमारी शिक्षा व्यवस्था
हमारी शिक्षा व्यवस्था को दैत्याकार असमानता ने चौपट कर रखा है। यही वजह है कि अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए नियमों को किसी हद तक तोड़ने को तैयार रहते हैं। इसी के साथ यह हमारे समय की चुस्ती भी है कि स्थानीय निकाय कानून को धता बताने वाले अभिभावकों को पकड़ने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार रहते हैं। इसमें सबसे खास मामला अपना गलत पता लिखाने का है, जिसके तहत अभिभावक यह दावा कर लेते हैं कि वे स्कूल के करीब ही रहते हैं। जांच अधिकारों के पंचाट ने कल यह फैसला दिया कि पूल बरो कौंसिल ने स्कूल की दाखिला नीति को छलने की कोशिश कर रहे एक परिवार की 21 बार जासूसी कर गैर वाजिब काम किया है।       
द इंडिपेंडेंट, लंदन

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