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अयोध्या में ताला खोले जाने के मामले में निर्णय सुरक्षित

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित विवादित स्थल का ताला खोले जाने के मामले में उच्च न्यायालय लखनऊ की विशेष पूर्णपीठ ने सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

विशेष पूर्ण पीठ इस मामले का भी निर्णय मालिकाना हक तय करने के मामले के साथ देगी। न्यायमूर्ति एस. यू. खान न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा की विशेष पूर्णपीठ ने हाशिम अंसारी एवं सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से प्रस्तुत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया।

28 जनवरी 1986  को फैजाबाद के स्थानीय अधिवक्ता उमेश पाण्डेय ने फैजाबाद जिले की मुंसिफ अदालत में अर्जी देकर कहा कि यह राम जन्मभूमि है और दर्शन के लिए ताला खोल दिया जाए। इस पर मुंसिफ अदालत ने कहा कि इस मामले की पत्रावली उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में है इसलिए वहां से पत्रावली मंगाई जाए। यह भी कहा गया कि इस स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं हो सकता।

इस आदेश के विरुद्ध उमेश पाण्डेय ने फैजाबाद के जिला जज के समक्ष निगरानी अर्जी प्रस्तुत की। इस अर्जी को स्वीकार करते हुए जिला जज ने एक फरवरी 1986  को ताला खोले जाने के आदेश दिए।

जिला जज के आदेश को पांच फरवरी 1986  को हाशिम अंसारी एवं सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर चुनौती दी जिस पर पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। विशेष पूर्णपीठ ने इस याचिका की भी सुनवाई पूरी होने पर निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

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  • Web Title:अयोध्या में ताला खोले जाने के मामले में निर्णय सुरक्षित