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फिगर बनाने का जुनून, बिगाड़ न दे बच्चे का भविष्य

फिगर बनाने का जुनून, बिगाड़ न दे बच्चे का भविष्य

मां के दूध को शिशु के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन आधुनिक और व्यस्त होते समाज में शिशु को मां का दूध पिलाने की प्रवृत्ति भी कम होती दिख रही है। इसके पीछे कारण भले ही कोई भी हो, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक आज की यह प्रवृत्ति शिशु के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

बांबे अस्पताल की पूर्व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ़ संयुक्ता राय ने बच्चों को स्तनपान कराने से जुड़ी महिलाओं की भ्रांतियों को दूर करने की अपील करते हुए कहा कि स्तनपान न कराना महिलाओं में स्तन कैंसर को न्यौता दे सकता है।

डॉ़ संयुक्ता के मुताबिक महानगरों में काम करने वाली अत्याधुनिक महिलाओं की धारणा बन गई है कि शिशु को स्तनपान कराने से उनका फिगर बिगड़ सकता है। हम समक्ष नहीं पाते कि यह भ्रांति आखिर आई कहां से है। बल्कि वास्तविकता ये है कि जो महिलाएं स्तनपान नहीं करातीं, उनमें बाद में स्तन कैंसर विकसित होने की आशंका ज्यादा होती है।

उन्होंने बताया कि शिशुओं को शुरू से स्तनपान कराने से उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जो आगे जाकर उन्हें निमोनिया, दमा और ऐसी ही कई बीमारियों से बचाती है।

इंडियाना विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार स्तनपान से शिशुओं के दिमागी विकास में मदद मिलती है। शोध के मुताबिक ऐसे बच्चे जिन्हें कम से कम एक वर्ष तक स्तनपान कराया गया, उनका मानसिक विकास छह महीने तक स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में ज्यादा हुआ।

डॉ़ संयुक्ता के मुताबिक अगर आप नौकरीपेशा हैं और शिशु को समय से दूध नहीं पिला सकतीं, तो भी कम से कम उसे बोतल के दूध की आदत न डालें, इसके स्थान पर कोई और विकल्प चुनें, जैसे अपनी दिनचर्या को उसकी आदतों के अनुरूप ढाल लें, जिससे उसे बाहर का दूध कम से कम मिले।

पोषक आहार विशेषज्ञ डॉ़ शिखा शर्मा स्तनपान कराने को समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशुओं के लिए भी वरदान बताती हैं।

डॉ़ शिखा ने बताया कि यह सच है कि कई महिलाएं प्रसव के बाद अपनी शारीरिक सुडौलता को दोबारा बनाने के फेर में अपने शिशुओं को स्तनपान नहीं करातीं, लेकिन समाज को यह बात समझने की जरूरत है कि मां के दूध में वो जादू है, जो समय से पहले जन्म लेने वाले शिशु को भी स्वस्थ बना देता है।

उन्होंने बताया कि मां के शुरुआती दूध को कोलोस्ट्रम कहते हैं, जिसमें प्रचुर मात्रा में प्रतिजैविक होते हैं। प्रकृति का नियम है कि अगर आपका शिशु समय से पहले इस दुनिया में आ गया है, तो मां का दूध भी उसके हिसाब से ही बन जाता है। ये दूध उसकी वही जरूरतें पूरी करता है, जो उसे मां के पेट के भीतर होती थीं।

डॉ़ शिखा ने कहा कि अगर आप अपने फायदे के लिए शिशु को स्तनपान से वंचित रख रही हैं, तो आप उसे विभिन्न बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना रही हैं।

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