DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

महिला क्रिकेटरों की संघर्ष की कहानी वृतचित्र की जुबानी

महिला क्रिकेटरों की संघर्ष की कहानी वृतचित्र की जुबानी

क्रिकेट इतिहासकार सुनील यश कालरा ने देश की महिला क्रिकेट खिलाड़ियों की संघर्ष की कहानी को वृतचित्र की जुबानी दुनिया के सामने रखने का फैसला किया है।

इस वृतचित्र में दिखाया गया है कि किस तरह भारतीय खिलाड़ियों को 2005 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए विश्वकप के दौरान प्रति मैच 2500 रुपये दिए जाते थे और कई बार उन्हें अनारक्षित रेल डिब्बों में यात्रा करनी पड़ी थी।

कालरा ने इस वृतचित्र को 'पूअर कज़िन्स ऑफ मिलियन डॉलर बेबीज़' नाम दिया है। इस वृतचित्र में कालरा ने मुख्य रूप से यही दिखाने का प्रयास किया है कि एक तरफ जहां पुरुष क्रिकेटर करोड़ों में खेलते हैं वहीं महिलाओं को मैच फीस भी समय पर नहीं मिलता है।

कालरा ने कहा कि मैं महिला क्रिकेट से कई वर्षो से जुड़ा हुआ हूं। इस टीम ने पुरुष टीम की सफलता की कहानी से पहले ही कई मील के पत्थर स्थापित किए थे लेकिन उन्हें इसका पुरस्कार और श्रेय एक बार भी नहीं मिला। क्रिकेट के प्रति प्यार और देश के लिए खेलने की लगन ने ही इन्हें अब तक खेलते रहने की प्रेरणा दी है।

''अगर एक पुरुष टीम के सदस्य को प्रति मैच 250,000 रुपये मिलते हैं तो महिला क्रिकेटर को 2500 रुपये दिए जाते हैं। कई बार तो उन्हें मैच खेलने के लिए अनारक्षित बोगियों में सफर करना पड़ा है। दोनों टीमों के बीच कोई तुलना नहीं है। इसके बावजूद महिला खिलाड़ियों को कोई शिकायत नहीं क्योंकि वे देश के लिए खेलना चाहती हैं। मैं अपनी फिल्म में यही सब दिखाना चाहता हूं।

इस वृतचित्र के लिए शोध भी कालरा ने ही किया है। उन्होंने इसकी पटकथा भी लिखी है और इसे फिल्माया भी है। करीब 27 मिनट के इस वृतचित्र का फिल्मांकन चार वर्षो में दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और भारत में किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:महिला क्रिकेटरों की संघर्ष की कहानी वृतचित्र की जुबानी