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दिल के मामले में अपने शरीर से प्रतिरोपण फायदेमंद: अध्ययन

दिल के मामले में अपने शरीर से प्रतिरोपण फायदेमंद: अध्ययन

हृदय रोगियों में महाधमनी वल्व [ऐरोटिक वल्व] को हटाने के बाद प्रतिरोपण उनके ही शरीर से फुफ्फुसीय वल्व [पल्मोनरी वल्व] से करना लाभप्रद होता है। किसी डोनर से प्राप्त ऐरोटिक वल्व की तुलना में पल्मोनरी वल्व अधिक फायदेमंद होता है।

एक नये अध्ययन के अनुसार, इस प्रक्रिया से जहां एक ओर मरीज का जीवनकाल तो बढ़ता ही है, साथ ही प्रतिरोपण के बाद जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है। गौरतलब है कि ऐरोटिक वल्व से होते हुए ऑक्सीजन से युक्त रक्त शरीर में आता है, जबकि पल्मोनरी वल्व वैसे रक्त को फेफड़े में जाने देता है जिसमें ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। गड़बड़ी और बीमारी के कारण ऐरोटिक वल्व को निकालना पड़ता है। करीब तीन दशकों से यह अतिसूक्ष्म प्रक्रिया चल रही है।

ऐरोटिक वल्व के गैर-यांत्रिक विकल्प की तुलना करने के लिए इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के सर मागदी याकूब के नेतृत्व में अध्ययन किया गया। उन्होंने 108 मरीजों में पल्मोनरी वल्व [ऑटोग्राफ्ट प्रक्रिया] और उतने ही [108 मरीजों] में किये गये ऐरोटिक वल्व [होमाग्राफ्ट प्रक्रिया] के प्रतिरोपण का अध्ययन किया। सारे ही मरीजों का ओपन हार्ट सर्जरी किया गया। दस वर्ष बाद ऑटोग्राफ्ट के केवल चार मरीजों की मौत हुई, जबकि होमोग्राफ्ट प्रक्रिया के तहत की गई सर्जरी में 15 लोग जीवित नहीं बच सके। इस रिसर्च ने साबित किया कि ऑटोग्राफ्ट में जीवित बचने की दर अधिक रही।

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