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गांवों का भारत 2050 तक शहरों का भारत होगा

गांवों का भारत 2050 तक शहरों का भारत होगा

देश की करीब 45 प्रतिशत आबादी 2050 तक शहरों एवं कस्बों में रह रही होगी और इस तरह से भारत गांवों में बसता है की अवधारणा बीते युग की बात हो चुकी होगी। अभी देश की 30 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है।

आर्थिक विश्लेषण संस्था, एनसीएईआर के एक अध्ययन के मुताबिक, एक मोटे अनुमान के आधार पर, 45 प्रतिशत भारतीय 2050 तक शहरों एवं कस्बों में रह रहे होंगे। इसका मतलब है कि अगले चालीस साल में शहरी आबादी और 37.9 करोड़ बढ़ चुकी होगी।

एनसीएईआर ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि भारत गांवों में बसता है। देश की करीब 70 प्रतिशत आबादी 6.20 लाख से अधिक गांवों में रहती है और देश के नीति निर्माताओं पर ग्रामीण आबादी का भारी प्रभाव है।

देश में शहरी क्षेत्र की परिभाषा के तहत न्यूनतम 5000 की आबादी वाला वह क्षेत्र शहरी कहा जा सकता है जहां नगरपालिका या नगर निगम नाम की संस्था हो और उसमें करीब 75 प्रतिशत पुरुष कामगार यदि गैर कृषि कार्यों में लगे हों। एनसीएईआर के मुताबिक, देश की कुल आबादी का महज 10 प्रतिशत हिस्सा शीर्ष 20 शहरों में निवास करता है।

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