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पौधों को ज्यादा स्वस्थ रखते हैं मिट्टी के गमले

पौधों को ज्यादा स्वस्थ रखते हैं मिट्टी के गमले

अगर आप घर में पौधा लगाना चाहते हैं तो गमला भी उसी आकार का लें, जैसा कि पौधा। वैसे बाजार में कई प्रकार के गमले मिलते हैं, लेकिन पौधे के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिट्टी का गमला ही ठीक रहता है। किस पौधे के लिए कैसा गमला ठीक रहेगा, इसकी और जानकारी दे रही हैं प्रतिभा आर्य।

फूलों के शौकीन सभी के पास छोटे सी बगिया बनाने के लिए पर्याप्त जमीन हो, आजकल यह एक सपना ही होता है। छोटे-छोटे कमरों वाली फ्लैट संस्कृति इतनी बढ़ गई है कि पूरी जीवनचर्या उन्हीं में सिमट कर रह जाती है। परन्तु पुष्प प्रेमी क्या करें, अब बागवानी की यह संस्कृति गमलों पर ही निर्भर हो गई है। चाहे चार गमले सदाबहार पौधों के हों या फिर एकमात्र गमला डहलिया का, फ्लैट में रहते हुए भी अपने को प्रकृति के इतने निकट होने का अहसास तो कराते हैं ही। ये गमले भी आज उतने ही महत्त्वपूर्ण हो गए हैं जितने कि पौधे, परन्तु एक बात जो बहुत ही ध्यान देने योग्य है कि पौधों के व्यक्तित्व के अनुरूप गमलों का होना, उनकी आवश्यकता के अनुसार उनका आकार व आकृति दोनों ही प्रभावात्मक होते हैं। गलत पात्र या गमला पौधे के आकर्षण को बेढौल बना देता है।

पहली बात तो है कि पौधे लगाने के लिए गमले कैसे लिए जाएं। आजकल सेरामिक्स, प्लास्टिक, सीमेंट, मिट्टी, पीतल आदि के भी गमले बाजार में बहुतायत में मिलते हैं, जो विभिन्न आकार व आकृति के होते हैं। मिट्टी के बने गमलों का प्रयोग सबसे अधिक होता है, परन्तु उनके साथ समस्या उन्हें संभालने की होती है, क्योंकि उनके टूटने की समस्या बहुत होती है। परन्तु पौधों के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिट्टी के गमले सबसे अधिक उपयोगी होते हैं। मिट्टी के गमलों में पानी को सोखने की क्षमता के कारण मिट्टी में ठंडक बनी रहती है और हरे पौधों के साथ गेरु रंग के गमले बहुत आकर्षक लगते हैं। सदाबहार पौधों के लिए भी मिट्टी के गमले सबसे अधिक लाभकारी होते हैं। चाहे सदाबहार पौधे हों या फिर फूल वाले, मिट्टी के गमले ही सबसे अधिक उपयुक्त होते हैं। परन्तु इस बात का ध्यान रखें कि गमला हमेशा पौधे के अनुरूप होना चाहिए। यदि पौधा बड़ा हो तो गमला बड़ा ही लेना चाहिए, परन्तु कई पौधे छोटे होते हैं तो उनके अनुसार गमला भी छोटा लेना चाहिए। बाजार में 4 इंच व्यास से लेकर 14 इंच व्यास के गमले मिलते हैं और यदि आपने झाड़ीनुमा बड़े पौधे लगाने है तो उसके लिए सीमेंट के बने बड़े गमले भी मिलते हैं। बोगनविलिया, मेंडरिन, इक्जोरा, पॉम, अकेलीफा जैसे बड़े पौधों के लिए सीमेंट के बने बड़े गमले ठीक रहते हैं।

बोन्साई के लिए आयताकार, चौकोर, अंडाकार, गोल नांद जैसे चपटी सतह वाले सेरामिक्स के गमले आते हैं, जो कि ऊंचे कम होते हैं और नांद की तरह होते हैं। इसी प्रकार सकुलेंट व कैक्टस परिवार के पौधों के लिए अक्सर बहुत बड़े गमले पसंद नहीं किए जाते हैं। हैवर्थिया, मैमेलेरिया एडीएन्टम जैसे पौधों के लिए चपटे नांदनुमा पात्र ठीक रहते हैं, तो कलैन्चो जैसे पौधों के लिए बड़े गमले लिए जाते हैं। आजकल पीतल व प्लास्टिक के गमले भी विभिन्न आकार में मिलते हैं, परन्तु इनमें कभी भी पौधे लगाने नहीं चाहिए। बल्कि यदि आप चाहे तो मिट्टी के गमलों में पौधे लगाकर उन्हें इन प्लास्टिक अथवा पीतल के पात्र के बीच में रख दें। इसमें फर्श भी गंदा नहीं होगा व पौधे भी सुंदर लगते हैं। कमरों के भीतर रखने के लिए लकड़ी, बेंत आदि के अत्यंत सुंदर पात्र व फ्रेम मिलते हैं, जिनके भीतर मिट्टी के पात्र रखकर आप कमरे को आकर्षक बना सकते हैं।

गमला लेते समय ध्यान रहे कि नीचे तल पर छेद अवश्य हो। पानी के निकास की व्यवस्था का प्रबंध अवश्य रखें अन्यथा पानी रुक जाने व अधिक पानी से पौधे की जड़ें गलने लगती हैं और उनमें फफूंद जन्य रोग हो जाते हैं। बरामदे में, कमरे में तो आप विभिन्न प्रकार के पात्रों का प्रयोग कर सकते हैं, परन्तु यदि आपको अपनी बगिया के पौधों के गमले रखने हों तो मिट्टी के गमले ही सर्वोत्तम रहते हैं, सुंदर भी लगते हैं। हां, उनकी साफ-सफाई का ध्यान रखना पड़ता है। गमले बाहर से गंदे हो जाने पर उन्हें सूखी बोरी या टाट से रगड़ देना चाहिए व साल में एक बार उन पर गेरू का रंग अवश्य लगाना चाहिए इससे पौधे भी स्वस्थ लगते हैं। ध्यान रहे कि पौधा कितना भी स्वस्थ व सुंदर क्यों न हो, यदि गमला बाहर से काई कीचड़ लगा, गन्दा है तो पौधा भी आकर्षण खो बैठता है। अत: पौधे के साथ उसके पात्र का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।

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