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संयुक्त राष्ट्र ने 45 नामों को प्रतिबंधित सूची से हटाया

संयुक्त राष्ट्र ने 45 नामों को प्रतिबंधित सूची से हटाया

संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित सूची की पहली बार समीक्षा करते हुए अलकायदा और तालिबान से जुड़े 45 लोगों और संगठनों का नाम इस सूची से हटा दिया है।

संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद से निपटने के प्रयास में कई व्यक्तियों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इस सूची में अलकायदा और तालिबान से जुड़े 488 आतंकवादी और आतंकवादी संगठनों के नाम हैं।

इनमें से जिनके खिलाफ यह प्रतिबंध हटाया गया है उसमें 35 अलकायदा और उससे जुड़े आतंकवादी संगठनों के सदस्य हैं, जबकि दस सदस्य तालिबान से संबंधित हैं।

इस प्रतिबंधित सूची को बनाने वाली सुरक्षा परिषद समिति के अध्यक्ष और आस्ट्रिया के राजदूत थामस मेर हार्टिंग ने कहा कि हम नौ वर्षों के बाद इस प्रतिबंधित सूची की पहली बार समीक्षा करने में सक्षम हुए हैं। इनमें से 75 प्रतिशत मामलों में हम नई जानकारी पाने में सक्षम हो सके।

संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जारी इस प्रतिबंधित सूची में दर्ज 488 नामों की समीक्षा करने के लिए 38 बैठकें हुईं। मेर हार्टिंग ने कहा कि मौजूद 443 नामों में 132 तालिबान से और 311 अलकायदा से संबंधित हैं, जिन्हें प्रतिबंधित सूची में बरकरार रखने का फैसला किया गया है। जबकि अन्य 66 नामों पर अभी विचार किया जा रहा है।

वर्ष 2001 के बाद से इस सूची में दर्ज 270 नामों की समीक्षा अभी तक नहीं की गई है। मेर हार्टिंग ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि सूची में इतने बड़े स्तर पर नामों के मौजूद होने से किसी बड़ी वास्तविक कार्रवाई की बात काल्पनिक प्रतीत होती है।

प्रतिबंध जारी करने के नए नियम के मुताबिक अब इस सूची में मौजूद नामों की प्रत्येक तीन साल पर समीक्षा की जाएगी। प्रतिबंध की इस सूची में तीस मृत लोगों का मौजूद होना इसकी विसंगतियों को बताता है। हाल ही में आठ मर चुके व्यक्तियों को इस सूची से निकाला गया है लेकिन नामों को इस सूची से निकालने की प्रक्रिया अभी भी बहुत धीमी है।

मेर ने कहा कि यह पूरब की तरह नहीं है कि कोई मर गया तो बात समाप्त। हमें यह देखना पड़ता है क्या इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि वह व्यक्ति वास्तव में मर चुका है। हमें इस बात की जानकारी रखनी पड़ती है उस व्यक्ति की संपति का क्या हुआ। कई मामलों में इसमें समय लगता है लेकिन इस प्रक्रिया को जारी रखा जाना है।

उन्होंने कहा कि इस मामले को देखने के लिए एक लोकपाल की नियुक्ति की गई है जिसका काम व्यक्तियों और संगठनों की ओर से उन्हें प्रतिबंधित सूची से हटाने के लिए दिए गए आवेदनों को देखना होगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने जून में युद्व अपराध प्राधिकरण के कनाडाई मूल के न्यायधीश को लोकपाल के पद पर नियुक्त किया है। किंबरले प्रोस्ट ही अब प्रतिबंधित सूची से संबंधित मामलों को देखेंगे।

प्रतिबंध समिति का गठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के द्वारा 1999 में पारित प्रस्ताव के आधार पर किया गया था। यह अलकायदा और तालिबान से जुड़े आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ उनकी आवाजाही, उनकी संपति को जब्त करने, और हथियारों की आपूर्ति को रोकने का काम करती है।

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