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रिजर्व बैंक की उदारता से ग्रामीण बैंकिग का कायाकल्प

रिजर्व बैंक की उदार नीतियों ने ग्रामीण बैंकिंग में जान फूँक दी है। इस पहल के बाद 28 बैंकों की नजर 70 करोड़ से ज्यादा ग्रामीणों पर टिक गई है। उन्हें भी शहरों की तर्ज पर हाईटेक बैकिंग का स्वाद चखाया जा रहा है। इसके लिए गाँवों में 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश होगा। विशेष एटीएम के अलावा सरकारी बैंकों में पहली बार दो लाख से ज्यादा भर्तियाँ की जा रही हैं जिनका 25 फीसदी हिस्सा पिछड़े क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।


शहरों में गली-गली बैंकों के जाल के बाद काम के लिहाज से बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं रह गई है। ऐसे में गाँव की ओर रुख करने के अलावा बैंकों के पास और कोई रास्ता भी नहीं था। रिजर्व बैंक द्वारा ‘दो हजार की आबादी पर एक बैंक’ के फरमान ने इस रास्ते को और पुख्ता कर दिया। 50 हजार तक की आबादी वाले इलाकों में आरबीआई की अनुमति के बिना शाखा खोलने की छूट से पिछड़े इलाकों में बैकिंग की रफ्तार तेज हो गई। एसबीआई के डीजीएम आरटी सचदेवा ने बताया कि इसकी एक वजह शहरों के मुकाबले संचालन का कम खर्च भी है। शहर में शाखा खोलने के लिए न्यूनतम 15-20 का स्टाफ चाहिए जबकि गाँव में 5 कर्मचारियों से भी काम चल जाएगा। फिलहाल देशभर में बैंकों की करीब एक लाख 10 हजार शाखाएँ हैं। इस हिसाब से 12 हजार की आबादी पर एक शाखा हुई। बैंकों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का महत्व इससे भी समझ में आता है कि 40 साल में यहाँ शाखाओं की संख्या 1860 से बढ़कर 36 हजार हो गई है। साढ़े छह लाख गाँव में से साढ़े पाँच लाख गाँवों को बैंकों ने कवर भी कर लिया है।
जीडीपी में ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी 22 फीसदी से ज्यादा होने के बाद बैकिंग बाजार पर कब्जा करने के लिए पीएनबी 550 नई शाखाएँ खोल रहा है। यूको बैंक 140, आईडीबीआई 300, इंडियन बैंक 400 और इलाहाबाद बैंक ने सालाना 69 शाखाएँ खोलने की योजना बनाई है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र 75 नई शाखाओं में से अधिकांश नार्थ ईस्ट, बिहार और झारखंड में खोलेगा।


सबसे आक्रामक तेवर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के हैं। एसबीआई ने मैकेंजी इंटरनेशनल को ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे करने के लिए 62.8 करोड़ रुपए दिए हैं। पाँच साल में 25 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य बनाकर चल रहा स्टेट बैंक 30 हजार क्लर्क और 5 हजार अधिकारियों की भर्ती कर रहा है। पहली बार ग्रामीण अधिकारी का पद सृजित किया गया है और पीओ (रूरल) की अलग से भर्ती की जा रही है। एक हजार नई शाखाएँ खुल रही हैं। एटीएम की संख्या 17 हजार से बढ़ाकर 25 हजार की जा रही है। डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के लिए विशेष एटीएम बनवाए गए हैं जिनकी कीमत 4.5 लाख से घटकर 1.5 लाख रुपए होगी। निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने ग्रामीण बाजार पर कब्जा करने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया है। एक ब्लाक में किसी स्थानीय व्यक्ति को ही फ्रेंचाइजी दी जाएगी। शुरुआत 600 ब्लाक से की जाएगी। डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नचिकेत मोर के मुताबिक गाँव में टच प्वाइंट्स बढ़ाने के लिए आसान एटीएम लगाए जाएंगे, जिसे आईआईटी चेन्नई ने तैयार किया है।


इस बारे में बैंकिंग संस्थान विद्यासागर के निदेशक विकास जैन ने बताया कि 2012 तक सभी बैंकों के विस्तार का सुनहरा काल है। ग्रामीणों को अत्याधुनिक बैकिंग का सुख देने के लिए ताबड़तोड़ नई शाखाएँ खुल रही हैं। एक लाख पदों पर भर्तियाँ हो चुकी हैं। 25 हजार के लिए आवेदन माँगे गए हैं और 6 महीने में 70 हजार पद और निकलने वाले हैं। इनमें से 35 फीसदी कर्मचारियों को ग्रामीण इलाकों में ही भेजा जाएगा।

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