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‘याद रखनी होगी सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी’

मेरे भजन एल्बम ज्यादा निकले हैं लेकिन मुङो गजल सिंगर के तौर पर जाना जाता है। कह सकता हूँ, यह बस सुनने वालों का असर है।’ अगले साल 70 बरस के पूरे होने जा रहे गजल सम्राट पदम्भूषण जगजीत सिंह कानपुर आए तो अपनी पहचान को लेकर कुछ ऐसा बोले।


हिन्दुस्तान में गजल और जगजीत सिंह एक दूसरे से पहचाने जाते हैं, लेकिन जगजीत सिंह खुद को भजन गायक भी मानते हैं। वह किसी एक भाषा में पूरी पकड़ की बात से भी सहमत हैं। दरअसल वह खुद नेपाली, पंजाबी, उर्दू, बंगाली, गुजराती समेत करीब 25 भाषाओं में गाना गा सकते हैं लेकिन वह इसे बड़ी बात नहीं मानते हैं। वह बताते हैं कि बड़ी बात तो किसी भी एक भाषा में पूरी पकड़ होना हो सकता है। क्योंकि जो भाषा गायक को खुद समझ आएगी वह उसी में बड़ा काम कर सकता है। आजकल के गीतों में भाषा की बात पर उनका कहना था कि गानों की भाषा चलताऊ हो चली है। संगीत से जुड़े लोगों का सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी याद न रखना इसकी बड़ी वजह है। इसके साथ ही नए दौर के बेहतर गायक पर चर्चा करते हुए उनका कहना था कि आजकल के गायकों में कुणाल गंजावाला और केके को वो सुरमई आवाज वाले गायक मानते हैं।

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