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गेम्स के साथ गेम मत खेलो

केंद्रीय सतर्कता आयोग के हाल ही के खुलासे ने दिल्ली सरकार व उसकी छह शीर्ष निर्माण एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश की महत्वपूर्ण योजना कॉमनवेल्थ गेम्स में कुछ अलग ही खेल खेला जा रहा है। ऐसे में खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष कलमाडी निर्माण कार्यो में हाथ न होने की बात कह रहे हैं। उधर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित को केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं है। यह तो खेल के बाद ही पता चलेगा कि देश ने क्या खोया व क्या पाया और इस खेल में किसने क्या खेल खेला। हमारी सरकार का वर्तमान लक्ष्य सभी खेल सम्बंधित परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करके खेल व देश की लाज बचाना होना चाहिए।                             
आशुतोष गंगानिया, दिल्ली

अतिथि देवो भव
आजकल टीवी चैनल्स पर एक विज्ञापन बार-बार दिखाया जा रहा है जिसमें आमिर खान अतिथि देवो भव का प्रचार करते नजर आते हैं और लोग उनकी बात का अनुसरण करते दिखते हैं। बात तो सही है लेकिन उन आम लोगों और भारतीय नागरिकों का क्या जिन्हें रोजाना न जाने कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कभी भीड़-भाड़ भरी जगहों पर लोगों को सरेआम बदमाश और चोर-डकैत लूट लेते हैं और बाकी लोग मूकदर्शक बने देखते रहते हैं। कभी महिलाओं के साथ बाजार, सड़क, बसों में छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है, तब भी सभी लोग मूकदर्शक बने रहते हैं। आखिर आमिर खान, अमिताभ बच्चन, सचिन, धोनी इस बारे में लोगों को जागरूक करते नजर नहीं आते, न ही कोई सरकारी, गैर सरकारी संगठन आगे आते हैं। विदेशी लोगों की इतनी चिंता है और अपने लोगों की किसी को नहीं।
तेजप्रकाश वर्मा

ट्रेन का स्टाप हो
एक ट्रेन जिसका नाम रोहतक-तिलक ब्रिज-बुलन्दशहर-रेवाड़ी है, प्रतिदिन शाम को पांच से साढ़े पांच के मध्य ओखला रेलवे स्टेशन से होकर निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन की तरफ बिल्कुल खाली जाती है। ओखला स्टेशन पर इसका स्टाप शायद नहीं दिया गया है। ठीक इसी समय के आसपास इस स्टेशन पर लगभग 250 से 300 तक दैनिक यात्री जो प्रतिदिन ओखला स्थित विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काम करके निजामुद्दीन व तिलक ब्रिज की ओर होकर विभिन्न स्थानों को जाने के यहां होते हैं। उनके पहुंचने का रेल ही एकमात्र साधन भी है। अच्छा होगा यदि ओखला स्टेशन पर मात्र आधे मिनट के लिए इस गाड़ी का स्टाप निश्चित कर दें।
चन्द्र शेखर काण्डपाल, सेक्टर-16, रोहिणी दिल्ली-110089

सभ्यता का पाठ
दिल्ली जहां दुनिया के चोटी के शहरों में शुमार हो गया है, वहीं दिल्ली की जनता ने मानो कभी न सुधरने की कसम खा रखी है। परिवहन के नियमों को ताक पर रखकर उन्हें दिनदहाड़े तोड़ना लोग अपना फर्ज समझते हैं। नियमों के हिसाब से गाड़ी चलाना अपनी शान के खिलाफ मानते हैं। चालक मनमाने तरीके से ओवरटेक और रेड लाइट तोड़ते हैं। लोग जहां-तहां कूड़ा-करकट फेंकना और मल-मूत्र से शहर को सड़ाना अपना धर्म मानते हैं। हमें सभ्यता का पाठ तो सीखना ही होगा। वरना राष्ट्रमंडल खेलों के वक्त हम विदेशी मेहमानों के सामने दिल्ली की क्या तस्वीर पेश करेंगे?
दिनेश वशिष्ठ 

हल चाहिये, हल्ला नहीं
जब कोई लुटा-पिटा अपनी शिकायत दर्ज करवाने किसी थाने में जाता है तो उसे कई बार नियमों तथा सीमाओं का हवाला देकर थाने से टरका दिया जाता है। कारण रिपोर्ट ‘यहां नहीं वहां’ लिखी जायेगी, नतीजा भुक्त भोगी को त्वरित सहायता मिलना तो दूर उसकी शिकायत तक दर्ज नहीं होती। वही सब कुछ आज बढ़ती महंगाई के मुद्दे को लेकर संसद में हो रहा है। जनता को महंगाई से तुरंत राहत चाहिये परंतु राहत पहुंचाने के नाम पर हर दल कोई नियम 168, कोई 184 तो कोई 193 को मुद्दा बनाकर महंगाई के चूल्हे पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकना चाहता है। क्या सत्ता क्या विपक्ष ‘नियमों के फेर में’ अपनी अपनी बात पर अड़े हुए हैं, महंगाई कम करना तो दूर महंगाई कैसे थमे उस पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में एक राय नही बन पा रही।   
सौरभ नागपाल, सादिक नगर, नई दिल्ली

सचिन तुझे सलाम                                             
सचिन तेंदुलकर ही हैं जो इक्कीस साल से अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं और सैंतीस साल की उम्र में भी जो शारीरिक फिटनेस, उत्साह, समर्पण, और अनुशासित हैं। इस सफलता के पीछे उनकी एकाग्रता, विनम्रता और क्रिकेट के प्रति समर्पण है। आज सचिन ऐसे क्रिकेटरों के साथ खेल रहे हैं जो उम्र में उनके आधे हैं। ऐसा खिलाड़ी सदियों में पैदा होता है।
अजय कुमार पाण्डेय

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