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कठिन समय

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की हाल में जारी मौद्रिक नीति पर खुश होने लायक कुछ भी नहीं है। महंगाई 11.7 प्रतिशत है जो कि निर्धारित लक्ष्य से 2.7 प्रतिशत ऊपर है। स्थानीय स्थितियां इसे कम करने के बजाय ज्यादा बढ़ाने वाली हैं। मानसून की तबाही का असर महसूस किया जा रहा है। ऊर्जा की कमी और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति ने अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर रखी है। अभी इस महंगाई के असर के तौर पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने का मसला भी आएगा, बिजली का बिल बढ़ेगा, जीएसटी भी बढ़ सकता है। दूसरी तरफ वैट पर प्रांतीय आमराय बनाने के लिए जंग छिड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में लग रहा है कि महंगाई की आधार रेखा 11 से 12 प्रतिशत के बीच होनी है न कि 9.5 प्रतिशत के आसपास। 
द न्यूज, पाकिस्तान

इको सब्सिडी
जिस आर्थिक प्रोत्साहन के अच्छे परिणाम मिले हैं उसे क्यों बंद कर दिया जाए ? सरकार ने शुक्रवार को तय किया कि वह पर्यावरण अनुकूलता और ऊर्जा की बचत करने वाली गाड़ियों पर दी जाने वाली सब्सिडी तय कार्यक्रम के मुताबिक सितंबर के अंत तक खत्म कर दी जाएगी। अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री मासायुकी नाओशिमा ने कहा कि ‘‘यह सब्सिडी अस्थायी और विशेष उपाय के तौर पर दी गई थी। यह सितंबर के अंत तक अपने आप खत्म हो जाएगी।’’ लेकिन हाल में आर्थिक बहाली की गति कम दिखी है। हम ऐसे उपाय को खत्म करने के लिए इसे उपयुक्त समय नहीं समझते, जिससे उपभोग बढ़ता है। व्यापारिक दायरे में भी उसे जारी रखने की जबरदस्त मांग उठ रही है। इस कार्यक्रम के लिए इस साल के बजट में एक खरब येन का रिजर्व फंड रखा गया है। कहा जा रहा है कि आर्थिक गति पैदा करने वाले इस कार्यक्रम को खत्म करने का यह सही समय नहीं है। 
यामुरी शिंबून, जापान

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