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गढ़वाली-कुमाउनी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

लोकसभा में सोमवार को गढ़वाली और कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की गयी। सदन में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के सतपाल महाराज ने यह मांग रखते हुए कहा कि गढ़वाली भाषा का एक लंबा इतिहास है और 13वीं तथा 14वीं सदी में मध्य हिमालयी साम्राज्य में इसी भाषा में राजकाज होता था।

उन्होंने कहा कि दसवीं सदी से गढ़वाली भाषा का लिखित साहित्य मिलता है लेकिन इतनी समृद्ध भाषाएं होने के बावजूद इन दोनों ही भाषाओं को उचित सम्मान नहीं मिल पाया। सतपाल महाराज ने हिंदी, पंजाबी और सिंधी अकादमी की तर्ज पर इन भाषाओं के संवर्धन के लिए भी अकादमी स्थापित किए जाने की मांग की।
    
कांग्रेस के भक्त चरण दास ने शून्यकाल में ही उड़ीसा के कालाहांडी में पिछले रेल बजट में की गयी घोषणा के अनुरूप रेलवे वैगन फैक्ट्री का निर्माण नहीं किए जाने पर अफसोस जताया।
    
उन्होंने कहा कि रेल मंत्री द्वारा पिछले रेल बजट में की गयी घोषणा पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है और अब वहां दस हजार लोग इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

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