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गेल इंडिया करेगी तीन साल में 30 हजार करोड़ रुपए निवेश

प्राकृतिक गैस कारोबार में लगी सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड ने अगले तीन साल में पाइपलाइन नेटवर्क, पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं के विस्तार और संयुक्त उद्यम क्षेत्र में 30,000 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है।

कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बीसी त्रिपाठी ने सोमवार को कंपनी के पहली तिमाही परिणाम जारी करने के मौके पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निदेशक मंडल ने अगले तीन साल में 30 हजार करोड़ रुपए के पूंजी निवेश को मंजूरी दी है। इसमें 60 प्रतिशत दाभोल-बेंगलुरु, कोच्चि़-बेंगलुरु और बवाना-नांगल (पंजाब) पाइपलाइन परियोजनाओं को पूरा करने खर्च होगा। ये परियोजनाएं दिसंबर 2012 तक पूरी होंगी।

कंपनी के पाटा पेट्रोकेमिकल संयंत्र की विस्तार योजना पर 30 प्रतिशत तक राशि व्यय होगी। संयंत्र की उत्पादन क्षमता को 900 टन सालाना तक बढाने की योजना है।  उन्होंने बताया कि इस पर 8,200 करोड़ रुपए की लागत आएगी और करीब साढे़ तीन साल में इसे पूरा किया जायेगा। शेष राशि कंपनी के संयुक्त उद्यमों और सहायक इकाईयों की गतिविधियों में लगाई जायेगी।

त्रिपाठी ने बताया कि इन परियोजनाओं के विस्तार कार्यों पर 7,000 करोड़ रुपए इसी वित्त वर्ष में खर्च होंगे।  इसमें से करीब 5,000 करोड़ रुपए तो पाइपलाइन परियोजनाओं में ही लगेंगे। गेल प्रमुख त्रिपाठी ने बताया कि पूंजीगत खर्च के वित्त पोषण के लिए निदेशक मंडल ने विभिन्न स्तरों के उधारी कार्यक्रम को भी मंजूरी दी है।  उन्होंने बताया कि एचडीएफसी से 1250 करोड रुपए का ऋण लिया जायेगा, जबकि इसी दिसंबर तक कंपनी 15 करोड़ डॉलर 700 करोड़ विदेशी वाणिज्यिक ऋण से तथा जनवरी 2011 तक 500 करोड़ रुपए बॉड से जुटायेगी।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में गेल का मुनाफा 35 प्रतिशत वृद्धि के साथ 887 करोड़ रुपए रहा है। कंपनी ने ऐसे समय उल्लेखनीय लाभ कमाया है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पहली तिमाही भारी घाटा हुआ है या फिर उनका मुनाफा काफी घट गया।

प्राकृतिक गैस के बिक्री कारोबार से कंपनी की आय आलोच्य तिमाही में 17 प्रतिशत बढ़ी है। गैस ट्रांसमिसन से होने वाली आय में तिमाही के दौरान 22 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई। एलपीजी ट्रांसमिशन से आय 8 प्रतिशत और एलपीजी तथा तरल हाइड्रोकार्बन व्यवसाय से 14 प्रतिशत आय वृद्धि हुई है।

अप्रैल से जून 2010 की पहली तिमाही में कंपनी ने रसोई गैस और मिट्टी तेल की सब्सिडी के तौर पर 445 करोड़ रुपए का योगदान किया है। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा 35 प्रतिशत बढ़कर 887 करोड़ और कुल कारोबार 18 प्रतिशत बढ़कर 7,096 करोड़ रुपए रहा है। सरकार द्वारा प्रशासनिक मूल्य नियंत्रण (एपीएम) गैस के दाम बढ़ाए जाने से भी कंपनी की आय बढ़ी है।

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