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अपेक्षाएं भगवान का तोहफा, भार नहीं: तेंदुलकर

अपेक्षाएं भगवान का तोहफा, भार नहीं: तेंदुलकर

सर्वाधिक टेस्ट मैच खेलने वाला क्रिकेटर बनने की दहलीज पर खड़े भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कहा कि क्रिकेट के दीवाने उनके देश की अपेक्षाएं बोझ नहीं हैं क्योंकि वह इन्हें भगवान का तोहफा समझते हैं।

तेंदुलकर ने कहा कि यह बोझ नहीं है। यह भगवान का तोहफा है। (क्रिकेट खेलने का) जो जज्बा मेरे अंदर है मैंने उस पर 20 बरस काम किया है। मैंने प्रत्येक लम्हें का लुत्फ उठाया। मुझे नहीं लगता कि यह बोझ है। यह जीवन में मेरी हसरत थी जो पूरी हो गई।

तेंदुलकर मंगलवार को जब श्रीलंका के खिलाफ मैदान पर उतरेंगे तो यह उनका 169वां मैच होगा और वह आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ के 168 मैच के आंकड़े को पीछे छोड़ देंगे। इस 37 वर्षीय बल्लेबाज ने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करना सपने के सच होने जैसा है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह लंबा सफर रहा। मुझे अब भी पहला टेस्ट मैच याद है जो मैंने पाकिस्तान में खेला था। वर्ष 1989 में खेलना क्रिकेट के अन्य प्रारूपों में खेलने के अनुभव से बिलकुल अलग अहसास था। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने लंबे समय तक खेलने का मौका मिला और यह मेरा सपना था। भारत के लिए खेलना मेरा सपना था और 169 टेस्ट खेलना बेजोड़ है। मैं इससे काफी संतुष्ट हूं।

तेंदुलकर ने कहा कि यह सफर काफी तेजी से पूरा हुआ। मेरी उम्मीद से तेज। समय निकल जाता है और आपको इसका लुत्फ उठाने की जरूरत है। यह एक चक्र की तरह है। इस चैम्पियन बल्लेबाज ने कहा कि उनके कैरियर में भी बुरा दौर आया लेकिन वह कड़ी मेहनत करके इससे निपटने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बुरा दौर आता है, लेकिन इस दौरान मैं जिस फार्मूले पर काम करता था वह यह था कि जब भी इस तरह का दौर आता तो मुझे कड़ी मेहनत करने का कारण मिलता।

तेंदुलकर ने कहा कि वह अब भी मैचों के लिए कड़ी तैयारी करते हैं और इसके कारण ही वह खुद को बदलते समय के अनुसार ढालने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मैच से पूर्व की तैयारी काफी अहम होती है। मुझे लगता है कि मैं हमेशा तैयार हूं। कभी-कभी मैं नतीजे हासिल करने में सफल रहता हूं और कभी नहीं लेकिन मैं हमेशा तैयारियों को अंजाम देता हूं। मुझे इस पर गर्व है।

यह पूछने पर कि उन्हें क्या लगता है कि उनका कौन सा समकक्ष उनके रिकार्ड तोड़ने में सफल रहेगा तो तेंदुलकर ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि यह खिलाड़ी भारतीय होगा। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि जो भी मेरा रिकार्ड तोड़े वह भारतीय हो।

तेंदुलकर ने कहा कि वह खुश हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 बरस बिताने के बाद उनके कैरियर में यह उपलब्धि आई। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए आपको निश्चित वर्षों, निश्चित संख्या में दौरे की जरूरत होती है। मैं काफी संतुष्ट हूं कि यहां पहुंचने के लिए 20 बरस से अधिक का समय लगा। यह बेजोड़ है।

तेंदुलकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमने उचित संख्या में टेस्ट क्रिकेट खेले और यह अच्छा है। मुझे लगता है कि 90 के दशक में मुझे कम टेस्ट मैच खेलने को मिले। ऐसा मौका भी आया जब साल में दो या तीन टेस्ट मैच की खेलने को मिले जो थोड़ा निराशाजनक था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

यह पूछने पर कि क्या वह युवा खिलाड़ियों को कोई सलाह देना चाहते हैं, तेंदुलकर ने कहा कि सपना देखना अहम है। दूसरी चीज यह है कि आप अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करो। ईमानदारी के साथ अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करो। ये एक दिन सच होंगे।

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