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सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन पर विचार

सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन पर विचार

सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय सेना की शैक्षिक और कानूनी शाखाओं में अस्थाई कमीशन पर नियुक्त महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने पर विचार हो रहा है।

सरकार ने इसे लागू करने के लिए दो महीने का समय मांगा है। सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश जेएम पंचाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सेना और वायुसेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को लागू नहीं करने के कारण रक्षा मंत्रालय के खिलाफ न्यायालय की अवमानना प्रक्रिया पर रोक भी लगा दी।

सरकार ने न्यायालय में कहा कि शार्ट सर्विस कमीशन के तहत कार्यरत महिला अधिकारियों को सेना अपने जज एडवोकेट जनरल [जेएजी] शाखा और शैक्षणिक शाखा में स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगी। इस संबंध में सालिसिटर जनरल गोपाल सुब्रहमण्यम ने न्यायमूर्ति जेएम पांचाल और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ के समक्ष शपथपत्र दाखिल कर कहा कि यह प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी हो जाएगी। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि शार्ट सर्विस कमीशन [एसएससी] की अधिकारी मेजर लीना गुरुंग के मामले में भी प्राथमिकता के आधार पर आवश्यकता अनुसार कदम उठाये जायेंगे। लीना अगस्त में सेवानिवृत्त हो रही हैं।

पीठ ने सरकार को अतिरिक्त शपथपत्र दायर करने को कहा ताकि शार्ट सर्विस कमीशन के बाद अधिकारियों को दिये जाने वाले स्थायी कमीशन की प्रकृति के बारे में जानकारी मिल सके। कोर्ट ने कहा कि सेना से जानकारी मिलने के बाद यह महिला अधिकारियों के स्थायी कमीशन के मुद्दे पर फिर से विचार करेगा।

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