अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खेलों के लिए 'कैलामिटी' बन गए हैं कलमाड़ीः अमर सिंह

खेलों के लिए 'कैलामिटी' बन गए हैं कलमाड़ीः अमर सिंह

राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर चारों ओर से विवादों में घिरे सुरेश कलमाड़ी को एक समय में उनके सहयोगी और अभिन्न रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह ने अब खेलों के लिए कैलामिटी (दुर्भाग्य) की संज्ञा दे डाली है।

अपनी लेखनी से समय-समय पर अपने पुराने सहयोगियों पर प्रहार करने के लिए पहचाने जाने वाले अमर ने अब कलमाड़ी पर हमला बोल दिया है। अमर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है भाई सुरेश कलमाड़ी को मैं वर्षों से जानता हूं। वह हंसमुख और मिलनसार भूतपूर्व सैन्य अधिकारी हैं।

बकौल अमर 1977 में कांग्रेस की पराजय के बाद कलमाड़ी तत्कालीन युवा नेता प्रियरंजन दासमुंशी और शरद पवार के संपर्क में रहे और इंदिरा कांग्रेस के विरोधी। राजीव गांधी के सत्ताहीन होने के बाद वह उस समय के उनके सहयोगी अरुण सिंह के निकट हो गए और उसके फौरन बाद पुणे में उनका मारुति का एक बड़ा शोरूम खुल गया।

कलमाड़ी के बारे में अमर ने आगे लिखा है कुछ दिन बाद वह शरद पवार के जीवन में वैसे ही अभिन्न बन गए, जैसे आज प्रफुल्ल पटेल हैं। बाद में पुणे की स्थानीय राजनीति में अजीत पवार की प्रतिद्वंदिता ने उनका हाथ शरद जी से छुड़ा दिया।

सपा के पूर्व नेता ने लिखा है अब सर्वप्रथम मेरे मित्र मणिशंकर अय्यर, फिर सीवीसी, सीबीआई, खेलमंत्री एमएस गिल और अंत में लंदन स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त तक ने कुछ ऐसे बयान दे डाले हैं कि भाई सुरेश कलमाड़ी भले ही कलमाड़ी हों, पर भारतीय खेलों की छवि के लिए कैलामिटी बन गए हैं।

अमर के मुताबिक खेलों का वाणिज्य महंगा पड़ता है, जिसने ऐसा किया, विवादित हुआ, वह चाहे कलमाड़ी हो या फिर ललित मोदी। खेल एक राष्ट्रीय भाव और सम्मान है।

अंत में अमर ने लिखा है सुरेश भाई के कामकाज को देश की जनता कुछ इस तरह पहचान रही है, आदमी पहचान लेते हैं कयाफा देख कर, खत का मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देख कर।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:खेलों के लिए 'कैलामिटी' बन गए हैं कलमाड़ीः अमर सिंह