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क्रिप्टोग्राफिक तकनीक की गंगोत्री है विकिलीक्स

हाल ही में पाकिस्तानी-तालिबानी गठबंधन को बेनकाब करती अमेरिकी सैन्य खुफिया दस्तावेजों के 90 हजार से अधिक पृष्ठों को विकिलीक्स पर प्रकाशित किया गया। मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यह विकिलीक्स आखिर है क्या बला?

विकिलीक्स.ओआरजी में हर किस्म के, बिना सेंसर किए, ऐसे गोपनीय दस्तावेज प्रकाशित किये जाते हैं जिन्हें सरकारें और संगठन अपने फायदे के लिए आम जन की पहुंच से दूर रखती है। विकिलीक्स तकनीक में तो भले ही विकिपीडिया के समान है पर विकि आधारित इस तंत्र पर कोई भी उपयोक्ता इसमें अपनी सामग्री डाल सकता है, परंतु इसकी सामग्री पूरी तरह अलग किस्म की होती है। और, यही विकिलीक्स का मूल सिद्घान्त है।

दरअसल, विकिलीक्स में कोई भी उपयोक्ता ऐसे दस्तावेजों को मुहैया करवा सकता है, जिन्हे प्रदान करने के लिए पहचान छुपाना भी उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। विकिपीडिया के विपरीत जहाँ उपयोक्ताओं के आईपी पते दर्ज किए जाते हैं, विकिलीक्स में क्रिप्टोग्रफिक तकनीक के जरिए इसके उपयोक्ताओं के पूरी तरह अनाम व अचिह्न्ति बने रहने की पूरी गारंटी दी जाती है।

जाहिर है, बहुत से दस्तावेज जिन्हें आम जनता तक पहुंचना चाहिए, परंतु गोपनीयता कानूनों, दंड और कानूनी कार्रवाई के भय से दबे और छुपे रह जाते हैं, निश्चित रूप से इसकी वजह से वे आम पाठक तक प्रचुरता में पहुंच रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी-तालिबानी गठबंधन की पोल खोलती 90 हजार से अधिक अत्यंत गोपनीय अमरीकी सैन्य दस्तावेजों का विकिलीक्स पर प्रकाशन भी इसका अप्रतिम उदाहरण है।

तमाम विश्व के हर क्षेत्र के स्वयंसेवी सम्पादकों के बल पर मात्र कुछ ही वर्षो में विकिपीडिया आज कहीं पर भी, किसी भी फॉर्मेट में उपलब्ध एनसाइक्लोपीडिया में सबसे बड़ा, सबसे वृहद एनसाइक्लोपीडिया बन चुका है। कुछेक गिनती के उदाहरणों को छोड़ दें तो इसकी सामग्री की वैधता पर कहीं कोई प्रश्नचिह्न् नहीं लगा। इसी की तर्ज पर एक नया प्रकल्प प्रारंभ किया गया है विकिलीक्स।

बुनियादी सिद्धांत
विकिलीक्स को आस्ट्रेलियाई हैकर जूलियन असांगे ने वर्ष 2006 में प्रारंभ किया और इसकाका विचार इतना प्रभावकारी रहा कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने इसे 2008 में नेस्तनाबूद करने का प्रयास भी किया।

सराहना और भर्त्सना
विकिलीक्स भी विकीपीडिया की तरह लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ता जा रहा है और साथ ही यह सरकारों की मुश्किलों को भी बढ़ाता जा रहा है। एक ओर जहां एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विकिलीक्स के कार्यो को सराहा है तो दूसरी ओर विकिलीक्स को दबाने खत्म करने के प्रयास भी हो रहे हैं। चीन में विकिलीक्स पर प्रतिबंध पहले से ही है। इन सबके बीच विकिलीक्स में घोटालों के उजागर होने का सिलसिला थमा नहीं है, और इसीलिए सुरक्षा के लिहाज से इसके सर्वरों को पूरी दुनिया में फैलाकर रखा गया है।

अवांछित इस्तेमाल
ऐसी आशंका भी निमरूल नहीं कि विकिलीक्स का इस्तेमाल गलत कार्यो के लिए भी हो सकता है। राजनीतिक दल, संगठन व व्यक्ति एक दूसरे की पोल खोलने व ब्लैकमेल करने के अस्त्र के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। गोपनीय दस्तावेजों की असलियत पर प्रश्न चिह्न् भी बना रहेगा। पर सचाई यह है विकिपीडिया की विश्वसनीयता पर भी शुरुआती दिनों में प्रश्नचिह्न् लगाए जाते रहे थे। गोपनीय दस्तावेजों के विकिलीक्स पर उपलब्ध होते ही इसकी सत्यता तथा इसकी आलोचना-प्रत्यालोचना संगठनों व सरकारों द्वारा तो की ही जा सकेगी, मतभिन्नता रखने वाले विभिन्न समूहों द्वारा भी इनका विश्लेषण खुलेआम किया जा सकेगा। ऐसे में इस तरह के प्रयोग की बातें बेमानी ही होंगी।  ऐसा विकिलीक्स का मानना है। इंटरनेट पर सैद्धांतिक अवज्ञा की यह गांधीगिरी बड़े गुल खिला रही है, यह तो हाल ही की घटनाओं से सिद्ध हो गया है!

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