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महिला पहलवान ने चयन प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल

महिला पहलवान ने चयन प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल

मशहूर पहलवान चंदगी राम की पुत्री और देश की पुरस्कृत पहलवान सोनिका कालीरमन ने दो महीने बाद राष्ट्रीय राजधानी में होने जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों के लिए महिला पहलवानों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

सोनिका ने अपनी याचिका में कहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है। सोनिका की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय कुश्ती महासंघ को सोमवार तक जवाब देने को कहा है।

दिल्ली निवासी 26 वर्षीया सोनिका ने अपनी याचिका में कहा है, ‘राष्ट्रमंडल खेलों के वास्ते लिए गए ट्रायल न्यायसंगत नहीं हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता के साथ चयन को लेकर न्याय नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता को अपनी काबिलियत साबित करने का मौका नहीं दिया गया, जबकि उसमें किसी प्रकार का दोष नहीं है। याचिकाकर्ता एक काबिल खिलाड़ी है और उसे राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम में चयन हेतु अपनी काबिलियत साबित करने का पूरा मौका मिलना चाहिए।’

सोनिका ने आरोप लगाया है कि औसत प्रदर्शन के बावजूद चयन समिति के लोग कुछ पहलवानों का पक्ष ले रहे हैं। सोनिका के मुताबिक ऐसे लोगों का पक्ष लिया जा रहा है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी आज तक कोई पदक नहीं जीता है। सोनिका ने कहा कि वह 3-14 अक्टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए पिछले चार वर्षों से तैयारी कर रही हैं और इस दौरान उन्होंने देश के लिए कई पदक भी जीते हैं।

याचिका में कहा गया है कि सोनिका ने 10 जनवरी, 2009 को पटियाला में प्रशिक्षण आरंभ किया था। इसके बाद उनका चयन अमेरिका स्थित डेव शुल्ट्ज इंटरनेशनल रेशलिंग टूर्नामेंट के लिए किया गया था। इसके बाद सोनिका टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका चली गईं लेकिन टूर्नामेंट के दौरान वह चोटिल हो गईं। उन्हें आराम की सलाह दी गई। चोट से उबरने के बाद सोनिका ने फिटनेस टेस्ट पास किया और फिर अक्टूबर 2009 में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया।

इसी महीने राष्ट्रीय कोचिंग कैम्प के लिए संभावितों की सूची जारी की गई लेकिन उसमें सोनिका का नाम नहीं था। इससे नाराज और निराश सोनिका ने अपनी बात महासंघ के सामने रखी और पत्र के माध्यम से भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय से भी संपर्क साधा।

खेल मंत्रालय की संतुति के बाद सोनिका को इस वर्ष जनवरी में राष्ट्रीय संभावितों की सूची में शामिल कर लिया गया। सोनिका ने इस संबंध में फरवरी में कैम्प में हिस्सा लिया। इस कैम्प में सोनिका का तीन पहलवानों का साथ सामना हुआ। अचानक 18 फरवरी, 2010 के दिन सोनिका को कैम्प छोड़ने के लिए कहा गया। इस फैसले से आहत और हैरान सोनिका दिल्ली पहुंची और इस संबंध में अधिकारियों को बताया लेकिन उनकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीम में जगह बनाने हेतु सोनिका अपने खर्चे पर प्रशिक्षण के लिए अमेरिका गईं। वह पिछले महीने वहां से लौटीं लेकिन अधिकारियों ने उनके मामले में चुप्पी साधे रखी। उन्होंने यह नहीं बताया गया कि आखिर उन्हें फरवरी में कैम्प छोड़ने के लिए क्यों कहा गया था?

सोनिका राष्ट्रमंडल खेलों में 72 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेना चाहती हैं। उन्होंने 1998 में राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। 12 वर्षों में वह कुल 16 खिताब जीत चुकी हैं। वर्ष 2002 में डेव शुल्ट्ज इंटरनेशनल रेशलिंग टूर्नामेंट में सोनिका ने तीसरा स्थान हासिल किया था।

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