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अमेरिकी निष्क्रियता से जलवायु परिवर्तन वार्ता पर संकट गहराया

अमेरिकी निष्क्रियता से जलवायु परिवर्तन वार्ता पर संकट गहराया

अमेरिकी सीनेट में जलवायु विधेयक की विफलता का सोमवार से इस विषय पर नए अंतरराष्ट्रीय समझौते के लिए शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय वार्ता पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीनेट की प्राथमिकता सूची से इस विधयेक को हटाने के इस निर्णय से गरीब देशों का अमेरिका और अन्य औद्योगिक देशों के ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के इरादे पर अविश्वास और गहरा जाएगा। दरअसल ग्रीन हाउस गैसें धरती के तापमान को खतरनाक स्तर तक बढ़ाकर अमीर देशों की अर्थव्यवस्था को प्राणवायु प्रदान कर रही है।

दरअसल जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अमीर और गरीब देशों के बीच मतभेद पिछले दिसंबर के कोपनहेगन सम्मेलन के बाद और गहरा गया। उस सम्मेलन में कोई बाध्यकारी समझौते होने के बजाय बस राजनीतिक इरादों वाले कुछ संक्षिप्त दस्तावेज सामने आ पाए।

ऑक्सफेम की केल्ली डेंट ने कहा कि प्राथमिकता सूची से इस विधेयक के हटाने से विकासशील देशों को बहुत निराशा हुई है, जिन्हें उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का प्रशासन जलवायु वार्ता पर नेतृत्व अपने हाथ में लेगा। सोमवार से जर्मनी के बॉन में हो रही पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वार्ता में 194 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

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  • Web Title:अमेरिकी निष्क्रियता से जलवायु परिवर्तन वार्ता पर संकट गहराया