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कलमाडी ने पत्रों के माध्यम से किया अनियमितताओं का खंडन

कलमाडी ने पत्रों के माध्यम से किया अनियमितताओं का खंडन

राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति (सीजीओसी) के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने ब्रिटिश कंपनी ए. एम. फिल्म्स को भुगतान के मामले में कथित अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए इस संबंध में लंदन स्थित उच्चायोग के साथ हुए संवादों का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखा है।

कलमाडी ने पत्रों के माध्यम से लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के उस कथन को गलत साबित करने का प्रयास किया, जिसमें कहा गया है कि इस विवाद में शामिल ए.एम. फिल्म्स नाम की कंपनी की सिफारिश उच्चायोग ने नहीं की थी।

भारतीय उच्चयोग ने शनिवार को इस बात से इंकार किया था कि उसने लंदन में होने वाले क्वींस बैटन रिले के लिए लंदन स्थित एम.एम. फिल्म्स का नाम सीजीओसी के सामने रखा था।

कलमाडी ने इस संबंध में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीजीओसी पर लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया था और फिर रविवार को भी वह अपनी बात पर अड़े रहे।

कलमाडी ने रविवार को कहा कि भारतीय उच्चयोग ने भी उसके सामने ए.एम. फिल्म्स की पैरवी की थी। यही नहीं, कलमाडी के मुताबिक उच्चयोग ने ए.एम. फिल्म्स की एक सहयोगी कंपनी की भी उसके सामने पैरवी की थी, जो मुख्य रूप से लंदन में कार किराए पर देने, मोबाइल स्क्रीन लगाने तथा मोबाइल शौचालय लगाने का काम करती है।

कलमाडी ने अपनी बात को साबित करने के लिए साक्ष्य के तौर पर तीन पत्र सामने रखे। उनके मुताबिक इनमें से एक पत्र भारतीय उच्चायोग ने उन्हें लिखा था जबकि दो अन्य पत्रों में से एक में राजू सबास्टियन का जिक्र है। राजू उच्चायोग में ही कार्यरत हैं।

कलमाडी ने अपने बयान में कहा, ''मीडिया ने खबर दी है कि लंदन में स्थित भारतीय उच्चयोग ने इस बात से इंकार किया है कि उसने मेसर्स ए.एम. कारपोरेशन एवं वैन नाम की कंपनी की सिफारिश सीजीओसी के सामने नहीं की। उच्चायोग ने यह भी कहा था कि पद के लिहाज से राजू इतने बड़े नहीं हैं कि वह किसी कंपनी की सिफारिश किसी प्रकार के आयोजन में हिस्सेदारी के लिए कर सकें।''

''हम उच्चायोग से यह जानना चाहते हैं कि हमने एक पत्र विक्रांत रतन के नाम लिखा था, जो उच्चायोग में प्रथम सचिव (प्रोटोकाल) पद पर कार्यरत हैं। हम रतन से जानना चाहते थे कि क्वींस बैटन के दौरान यातायात, ठहरने और अन्य सेवाओं के संबंध में किन कंपनियों से सेवाएं ली जा सकती हैं। इस संबंध में हमने रतन से उन कंपनियों के किराए के बारे में भी पता लगाने का अनुरोध किया था।''

''इसके जवाब में राजू सबास्टियन ने हमें दो कंपनियों के नाम भेजे थे। राजू उच्चयोग में प्रोटोकॉल विभाग में काम करते हैं और उन्होंने हमारे उसी पत्र का जवाब दिया, जो हमने रतन को लिखा था। राजू ने हमें ए.एम. कार एवं वैन तथा एक अन्य सॉफर कंपनी का नाम भेजा था। साथ ही उन्होंने हमें वे दर भी भेजे थे, जिस पर उच्चोयाग इस कंपनी की सेवाएं लेता रहा है। मैं अपने पत्र में राजू द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति संलग्न कर रहा हूं।''

''इससे यह साफ है कि भारतीय उच्चयोग ने ही लंदन में होने वाले क्वींस बैटन रिले के आयोजन से जुड़ी तैयारियों के लिए मेसर्स ए.एम. कार एवं वैन्स कंपनी का नाम हमारे सामने रखा था।''

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