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कष्टमय अनुभव के कारण प्रेमचंद की लेखनी बनी कालजयी

कष्टमय अनुभव के कारण प्रेमचंद की लेखनी बनी कालजयी

जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के कष्टमय अनुभवों ने कलम के सिपाही प्रेमचंद की लेखनी को इतना महान बनाया। उपेक्षा में उनका जीवन बीता और लेखन कार्य से बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण पोषण चला।

बाल मनोविज्ञान से लेकर वयस्क और स्त्री पात्रों से समाज का हाले बयां करने वाले प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में इतना वैविध्य भरा कि आज भी उसकी सानी नहीं। प्रेमचंद ने आठ दशक पहले जो लिखा वह आज भी लोकप्रिय है। उन्होंने समाज के यथार्थ को छुआ और परखा तथा इसे साहित्य में पिरोया।

कथा, कहानी और उपन्यास में उन्होंने जो यथार्थवाद भरा और उसे सरलता तथा सरसता से बयां किया आज के रचनाकार तो इस प्रतिस्पर्धा में आस पास भी नहीं पहुंचते। प्रेमचंद की साहित्य रचना के बरक्स आज के हालात में साहित्यिक खालीपन के संबंध में पूछे जाने पर महान साहित्यकार के पोते आलोक राय ने बताया कि समाज में वही पीड़ादायी परिस्थतियां आज भी हैं लेकिन आज के रचनाकार कुछ नयापन चाहते हैं। यथार्थ को कहने का तरीका व्यक्तिवादी अधिक हो गया है।

राय ने कहा कि हर कालखंड में प्रवृत्तियां हावी होती हैं। नये रचनाकारों में व्यक्तिवादी नजरिया जादुई आकर्षण कम होने का कारण हो सकता है।

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