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15 जुलाई, 2020|4:30|IST

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विश्व मुक्केबाजी में पेशेवर बनने का सपना सच होगा : जितेंदर

विश्व मुक्केबाजी में पेशेवर बनने का सपना सच होगा : जितेंदर

बचपन से पेशेवर बनने का सपना संजाए ओलंपियन मुक्केबाज जितेंदर कुमार का यह ख्वाब नवंबर में होने वाली विश्व मुक्केबाजी सीरीज में पूरा हो जाएगा। हालांकि उन्हें इतनी जल्दी इसके सच होने की उम्मीद नहीं थी।
    
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले जितेंदर की उपलब्धियों को देखते हुए अर्जुन पुरस्कार के लिए उनके नाम की सिफारिश की है और वह उन पांच भारतीय मुक्केबाजों में शामिल हैं, जिन्हें विश्व मुक्केबाजी सीरीज के लिए दिल्ली फ्रेंचाइजी टीम में चुना गया है।
    
साल 2008 में कैमिस्ट्री कप में स्वर्ण पदक जीतने वाले जितेंदर के जबड़े की सर्जरी हुई, जिसके कारण उन्हें काफी समस्या हो रही थी लेकिन अब वह ठीक हैं। इसी चोट के कारण वह हाल में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में भी शिरकत नहीं कर पाए थे, जिसके लिए महासंघ ने मेडिकल ग्राउंड पर ही मुक्केबाजों को रियायत देने का फैसला किया था।
   
अभी पटियाला में लगे राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के कोर ग्रुप के साथ शिविर में ट्रेनिंग कर रहे बीजिंग ओलंपिक के क्वार्टरफाइनल में पहुंचने वाले जितेंदर ने कहा कि अब मैं काफी राहत महसूस कर रहा हूं और ट्रेनिंग बढ़िया चल रही है। मैं पूरी तरह फिट हूं। ट्रेनिंग में कोई समस्या नहीं है।
    
राष्ट्रमंडल खेलों के लिए चयन ट्रायल अगस्त के दूसऱे़तीसरे हफ्ते में किया जाएगा। जितेंदर विश्व मुक्केबाजी सीरीज में खेलने को लेकर काफी उत्सुक हैं क्योंकि वह बचपन से ही पेशेवर बनने के बारे में सोचते थे। हालांकि सीरीज में खेलने से उन्हें ओलंपिक से भी दूर नहीं रहना पड़ेगा, यह सोने पे सुहागा है।
    
एशियाई चैम्पियनशिप में दो कांस्य जीतने वाले इस 54 वर्ग के बैंथमवेट मुक्केबाज ने कहा कि मैं बचपन से पेशेवर होने का सपना देखता था, लेकिन यह नहीं पता था कि इतनी जल्दी ऐसा हो जाएगा। मैं इससे काफी खुश हूं।
    
पिछले साल जून में झुहाई में हुई एशियाई सीनियर मुक्केबाजी चैम्पियनशिप और 2008 दिसंबर में एआईबीए मुक्केबाजी विश्वकप में कांस्य पदक जीतने वाले इस 22 वर्षीय युवा मुक्केबाज ने कहा कि एमेच्योर में ही अब पेशेवर रूप की विश्व मुक्केबाजी सीरीज की शुरूआत हो गई, मैं इसमें सभी बाउट खेलना चाहता हूं।
    
जितेंदर 54 किग्रा वर्ग में अपने सखा अखिल कुमार के साथ दिल्ली फ्रेंचाइजी में शामिल हैं, जिसमें इनके अलावा जय भगवान (61 किग्रा), विजेंदर सिंह (85 किग्रा) और दिनेश कुमार (91 किग्रा से अधिक) भी हैं।
   
साल 2007 में बैंकॉक में हुए किंग्स कप में रजत पदक हासिल कर चुके इस मुक्केबाज ने कहा कि लेकिन अच्छी बात यह है कि पेशेवर होने के बावजूद मैं ओलंपिक में खेल सकता हूं।

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