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श्रद्धालुओं के दर्शन को रखे गए अस्थिकलश

तथागत के ज्ञान स्थल पर रविवार को शाक्यमुनि बुद्ध तथा उनके दो शिष्यों अरहंत सारिपुत एवं महाभोगलाना के धातु अवशेषों (अस्थि) की शोभायात्रा निकाली गई। स्थानीय कालचक्र मैदान से विशाल बुद्ध मूर्ति तथा इन अस्थिकलशों को हाथी पर रखकर सर्वसाधरण के समक्ष लाया गया। जयश्री महाबोधि विहार (श्रीलंका बौद्ध मंदिर) की दूसरी सालगिरह पर आयोजित इस तीन दिवसीय समारोह अंतर्गत शोभा यात्रा में विभिन्न देशों के हजारों बौद्ध श्रद्धालु व स्थानीय स्कूली बच्चे शामिल हुए।ड्ढr ड्ढr दोपहर दो बजे से चार बजे के बीच इस ऐतिहासिक क्षण के दरम्यान यहां अद्भुत वातावरण दिखा। शोभायात्रा में सेना के बैंड तथा बग्घी पर सवार बुद्ध मूर्ति के पीछे दो हाथियों पर अस्थिकलश रखे गए थे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाली गई शोभायात्रा को विदेशी पर्यटक भी काफी उत्सुकता से निहार रहे थे। अस्थि कलश के पीछे स्कूली बच्चों द्वारा निकाली गई झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया बोधगया के भिक्षु प्रभारी वेन पी शिवली थेरो के नेतृत्व में निकाली गई इस शोभा यात्रा का स्वागत सैकड़ों बौद्ध श्रद्धालुओं ने काफी गर्मजोशी से किया।ड्ढr इससे पूर्व प्रात: छह बजे अस्थिकलशों को महाबोधि मंदिर लाकर पूजा-अर्चना की गई। उसके उपरांत धातुवशेषों को जयश्री महाबोधि विहार में दर्शनार्थ रखा गया। बौद्ध भिक्षुओं को संघदान भी कराया गया। इस अवसर पर एक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया जिसका उद्घाटन डीएम संजय कुमार सिंह ने किया ।

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  • Web Title: श्रद्धालुओं के दर्शन को रखे गए अस्थिकलश