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रांची के सभी पीएसयू कर रहे हैं रक्षा मंत्रालय का काम

एचइसी, मेकन, आरडीसीआइएस के बाद अब सीएमपीडीआइ का नाम भी रक्षा मंत्रालय के लिए काम करने वाले प्रतिष्ठानों में जुड़ गया है। इसके साथ ही रांची देश का ऐसा शहर भी हो गया है, जहां के प्राय: सभी पीएसयू रक्षा मंत्रालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। हाल ही में सीएमपीडीआइ ने इंडियन नेवी से कार्यादेश प्राप्त कर रांची को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सीएमपीडीआइ को नौसेना के मझगांव डॉकयार्ड निर्माण के लिए तकनीकी कंसल्टेंसी देने का काम मिला है। खासकर नौसेना के जहाज के एलाइनमेंट को सेट करने के लिए सीएमपीडीआइ कंसलटेंसी देगा। सीएमपीडीआइ यह काम नो प्रोफिट नो लॉस के आधार पर करगा। रांची स्थित मेकन ने पहले ही रक्षा मंत्रालय के लिए काम किया है। मेकन ने बैटरी चालित दस्ताना एवं मोजे की डिााइन तैयार कर उसे विकसित किया है। इसका उपयोग रक्षाकर्मी शून्य से भी कम तापमान पर कर सकते हैं। इसके अलावा मेकन ने एंटी टैंक मिसाइल की त्रुटियों को दूर करने में बड़ा योगदान दिया है। आरडीसीआइएस ने इस्को के साथ मिलकर इंडियन नेवी के लिए बल्ब बार का निर्माण किया है। इसका उपयोग नौसेना के जहाज के निचले स्तर पर मरम्मत के लिए उपयोग किया जाता है। इसका निर्माण करने की प्रक्रिया काफी जटिल है। पहले देश इसका आयात रूस से करता था। आरडीसीआइएस ने टैंक में उपयोग आने वाले आरमर प्लेट का निर्माण भी किया है। एचइसी शुरू से ही रक्षा मंत्रालय के लिए काम करता रहा है। इसने थल सेना के अजरुन टैंक के बैरल एवं कई उपकरणों का निर्माण किया है। रक्षा मंत्रालय के आयुध फैक्ट्री को भी कई मशीनों का निर्माण एचइसी ने किया है। इसके अलावा नौसेना के लिए एटॉमिक उपकरण भी एचइसी ने बनाये हैं।

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