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चा्रेडा की 50 करोड़ की योजना खटाई में

वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य के किसी भी गरीब के घर में उााले की संभावना नहीं है। न तो इस वर्ष एक मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हुआ और न ही एक भी सोलर लैंप की खरीदारी हुई। वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अब 65 दिन ही शेष हैं। लेकिन गैर पारंपरिक ऊरा (सोलर) से उााले की लगभग 50 करोड़ की योजना खटाई में पड़ गयी है। इस मद में केंद्र से प्राप्त राशि और राज्य योजना मद की राशि 31 मार्च को लैप्स होने के कगार पर है। वहीं, अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा गरीब जनता झेलने को विवश है।इस वर्ष राज्य सरकार ने सोलर सिस्टम से उााले के लिए 35 करोड़ का बजट प्रावधान किया था। इसके अलावा राज्य के 75 पुलिस पिकेट और थाने, 1स्तूरबा गांधी विद्यालय तथा 44 गांवों में सोलर सिस्टम लगाना है। राज्य योजना से 20-21 करोड़ की राशि से 50 हाार सोलर लालटेन, पांच हाार सोलर स्ट्रीट लाइट और दो हाार सोलर होम लाइट खरीदने का टेंडर भी निकला, लेकिन वित्त विभाग से बजटीय आवंटन प्राप्त नहीं होने के कारण टेंडर की अवधि समाप्त हो गयी। सूत्रों के अनुसार खरीदारी की प्रक्रिया शुरू होते ही, एजी ऑडिट रिपोर्ट की कुछ आपत्तियों को लेकर वित्त विभाग ने आवंटन रोक दिया। हालांकि उसकी कई स्तरों पर जांच हुई, ज्रेडा ने आपत्तियों का बिंदुवार जवाब भी दिया। इसमें कुछ खामियां भी पायी गयीं। लेकिन, सोलर लालटेन की खरीदारी इससे और उलझ गयी।इसी तरह उग्रवाद प्रभावित 75 थाने और पिकेट के लिए केंद्र से आवंटन के बाद भी अब तक गृह विभाग ने मैचिंग ग्रांट और थानों की सूची ज्रेडा को नहीं सौंपी है। यही हाल 1स्तूरबा गांधी विद्यालय के मामले में भी हुआ। इसके लिए भी केंद्र ने पैसा उपलब्ध करा दिया है। इस मामले में भी अब तक यह तय नहीं हुआ है कि मैचिंग ग्रांट शिक्षा विभाग देगा या ऊरा विभाग।

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