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बंद करो यह नाटक

‘यह डंडा उठाए कहां से आ रहे हो?’ वह बताने लगा: ‘मैं और मेरे साथी आज एक स्कूल में गए थे जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर एक अंग्रेजी नाटक हो रहा था। नाटक एक उद्दंड छात्र के बारे में था जो एक दिन अपने टीचर की पिटाई कर देता है। जरा सोचो, छात्र-छात्राओं पर उसका कितना दुष्प्रभाव पड़ेगा। यह पश्चिमी संस्कृति हमारी सदियों पुरानी मूल्य-मान्यताओं को खोखला कर रही है। हमने नाटक रोकने के लिए कहा लेकिन प्रबंधक नहीं माने। उस पर हमने जमकर तोड़-फोड़ की और नाटक कर रहे लड़के-लड़कियों की खूब पिटाई की। कुछ तो अस्पताल पहुंच गए। ठीक किया न हमने?’ मैंने कहा : ‘सही किया, लगे रहो। ये सब बातें हमारी महान संस्कृति के खिलाफ हैं। अब आगे क्या इरादा है?’ ‘आजकल हम वेलेंटाइन डे की तैयारी कर रहे हैं।’ ‘क्या कहा, तुम लोग वेलेंटाइन डे मनाओगे?’ ‘नहीं, नहीं, हम इसका विरोध करंगे। उस दिन ग्रीटिंग कार्ड और गिफ्ट बेचनेवाली दुकानों पर धावा बोलेंगे। फूल बेचनेवालों को भी सबक सिखाएंगे। लड़के-लड़कियों को एक साथ चलने या बैठने नहीं देंगे।’ मैंने कहा : ‘सबसे पहले तुम लोगों को वेलेंटाइन नाम के उन शख्स को ढूंढ़ना चाहिए जिसने इस दिन की शुरुआत की है।’ वह बोला : ‘उसे भी ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। मिल गया तो बच्चू को नानी याद दिला देंगे। यह पश्चिमी तौर-तरीके हमार महान देश की संस्कृति को मटियामेट करने पर तुले हुए हैं।’ मैंने सुझाया : ‘तुम लोगों को अंग्रेजी भाषा और पश्चिम से आई हर चीज के खिलाफ ऐलान-ए-ांग करना चाहिए। इस देश में अंग्रेजी कलेंडर नहीं चलेगा। शर्ट, पैंट, कोट, जीसं, स्कर्ट, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, रल, हवाई जहाज, बिजली, रसोई गैस, मेज-कुर्सी, कप-प्लेट, चम्मच वगैरह सभी हमारी संस्कृति पर धब्बे हैं। प्यार-मुहब्बत की फिल्में भी हमारा करक्टर खराब करती हैं। सिर्फ धार्मिक फिल्में बननी चाहिए। और हां, पब और बार में शराब के बजाए भांग सर्व होनी चाहिए।’ उसने सहमति जताई : ‘आप ठीक कहते हैं। अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए हम खून-पसीना एक कर देंगे। लेकिन सबसे पहले अश्लीलता और नंगेपन को जड़ से उखाड़ फेंकना है, चाहे कोई पेंटिंग हो या मूर्ति, या कुछ और।’ तभी मेरी नार सामने पार्क पर गई जहां कुछ गाएं खड़ी थीं और कुछ कुत्ते एक दूसर के पीछे दोड़ रहे थे। मैंने कहा : ‘इन आवारा पशुओं का भी कुछ किया जाना चाहिए, जो सरआम नंगे घूमते हैं। मैं तो यहां तक कहूंगा कि सभी कबूतरों और कौवों को भी कपड़े पहनाए जाने चाहिए।’ वह सोचने लगा ओर चलते-चलते बोला : ‘बहुत बढ़िया आइडिया है। आज ही मैं अपने गुरुाी से इस बार में बात करूंगा।’

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