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चाज पर रेप का आरोप राज्य सरकार को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नदिया के जिला जज पर लगे रप के आरोप के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केाी बालाकृष्णन और पी सथाशिवम की खंडपीठ ने इस मामले में नोटिस जरूर जारी किया लेकिन बलात्कार की पीड़ित युवती के व्यवहार पर आश्चर्य भी व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि लड़की ने घटना के छह दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करवाई। पहले वह बार एसोसिएशन के पास गई और उससे परामर्श लेती रही। खंडपीठ ने कहा कि युवती का यह व्यवहार शक पैदा करता है। लेकिन आयोग के वकील ने कहा कि पिछले चार साल से इस मामले में जांच लंबित है लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही है। यहां तक के कि फोरंसिक जांच के लिए जज के खून और बाल के नमूने भी नहीं लिए गए हैं। यदि रप का आरोप झूठा है तो पुलिस को उसका भी खुलासा करना चाहिए। आयोग ने कहा कि युवती की याचिका पर आयोग को यह पहल करनी पड़ी है। तलाकशुदा और एक बच्चे की मां युवती (27) ने कहा है कि एक केस के सिलसिले में जज ने उसके घर आकर उसके साथ जबरदस्ती की।

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