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कहने को घर, दिखते स्लम जसे

ढहती दीवार, जर्जर छत और आसपास की नारकीय स्थिति। यह किसी स्लम का आउटलुक नहीं बल्कि प्रतिष्ठित पटना विवि के शिक्षकों के आवास का नजारा है। बरसात में टपकती छतें कब दीवारों का साथ छोड़ देंगी, कहना मुश्किल है। मौत के साए में शिक्षक रहने को विवश हैं और विवि प्रशासन इसके लिए ठोस योजना नहीं तैयार कर पा रहा है। बैचलर क्वार्टर में बरसात के दौरान एक शिक्षक के आवास में प्रवेश करने वाली सीढ़ी ढह गयी थी। इसमें उनके एक संबंधी जख्मी हो गए थे।ड्ढr ड्ढr मौके पर पहुंचे प्रति कुलपति प्रो. एसआई अहसन ने घोषणा की थी कि बैचलर क्वार्टर से ही शिक्षक आवास की मरम्मत व जीर्णोद्धार का कार्यक्रम शुरू होगा। लगभग सात माह बीतने के बाद भी वहां पर कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। विवि के लगभग सभी शिक्षक आवासों की स्थिति एक जसी है। मरम्मत छोड़ दें वहां पर लगभग 25 वर्षो से रंगाई-पुताई तक नहीं हो सका है।आवास भत्ता के रूप में शिक्षकों के वेतन से हर माह राशि की कटौती होती है।ड्ढr ड्ढr इससे विवि प्रशासन को मासिक दो लाख रुपये की आमदनी होती है लेकिन इस राशि का उपयोग अन्य मदों में होता है। पटना विवि में लगभग 60 क्वार्टर हैं। इनकी मरम्मत के लिए हर साल सीनेट की बैठक में कुलपति घोषणा करते हैं। इस बार भी डा. श्याम लाल ने घोषणा की है कि शिक्षक आवास की स्थिति सुधरगी। वर्ष 2008 के फरवरी में कुलपति ने 20 लाख रुपये आवास मरम्मत के लिए एलॉट किए गए थे। विवि प्रशासन के अनुसार इांीनियरिंग शाखा की कमजोरी से कार्य शुरू नहीं हुआ। इस संबंध में पूटा महासचिव डा. रणधीर कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षकों के आवास के प्रति विवि प्रशासन संवेदनशील नहीं है। इस कार्य के लिए एक कमिटी गठित की गयी है लेकिन वह ठीक ढंग से कार्य नहीं कर रही।ं

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