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इंद्रपुरी प्राथमिक विद्यालय: शिक्षक 3, बेंच 4,बच्चे ही लेते क्लास

रािस्टर में बच्चों का नामांकन-10। तीन शिक्षक। एक सरकारी काम से छुट्टी पर हैं तो दूसर लंबे अवकाश पर। स्कूल में कुल जमा चार बेंच। भवन कोई नहीं महा झोपड़ी। शौचालय के नाम पर रलवे लाइन। बच्चों को पेयजल के लिए आस-पास के लोगों के रहमोकरम पर मिलता है। वर्ग पांच के बच्चे वर्ग एक और दो के बच्चों को पढ़ाते हैं। यह हाल है इंद्रपुरी प्राथमिक विद्यालय का।ड्ढr ड्ढr बोरिंग रोड पानी टंकी के पास यह विद्यालय 1से चल रहा है। यहीं पर 1से एएन कॉलेज प्राथमिक विद्यालय भी झोपड़ी में चल रहा है। इसमें 148 बच्चे और चार शिक्षक हैं। बच्चों ने बेंच देखा तक नहीं है। जब राजधानी में चलने वाले स्कूलों की ऐसी दुर्गति है तो सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्थिति क्या होगी सहा ही अंदाजा लगाया जा सकता है। रलवे लाइन का शौचालय के रूप में उपयोग करने से कभी भी बच्चों की जान पर भी खतरा है। बरसात में झोपड़ी चूने लगती है और स्कूल में पानी भर जाता है। दोनों स्कूलों के बगल में पड़े सड़े-गले कूड़े के ढेर से उठती दरुगध के कारण बच्चों को बैठना मुश्किल है। इसके बावजूद बच्चों में पढ़ाई की ललक कम नहीं है। वैसे सरकार ने छह रूम का दो मंजिला भवन बनाने का सपना 2007 में ही दिखाया था। इसके लिए 13-13 डिसमिल जमीन की नापी भी हुई लेकिन योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। इंद्रपुरी स्कूल में बच्चे आते तो हैं लेकिन शिक्षक नहीं रहने की वजह से वापस लौट जाते हैं।ड्ढr ड्ढr शिक्षिका विथिका देवना ने बताया कि अभी मात्र एक शिक्षक पर कक्षा एक से पांच तक के 10 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। इस कारण सीनियर क्लास के बच्चे जूनियर बच्चों को पढ़ाते हैं। एएन कॉलेज प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक विमल भूषण सिंह ने बताया कि शौचालय बनाने के लिए पैसा आया पर जमीन नहीं रहने से लौट गया। इस बार में जिला शिक्षा अधीक्षक शशि भूषण राय ने बताया कि स्कूल का भवन बनाने के लिए नगर निगम से जमीन की मांग की गयी है।ं

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