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25 विभागों का दस वर्ष से ऑडिट नहीं

राज्य सरकार का ऑडिट विंग निष्क्रिय हो गया है। महालेखाकार (एजी) के अलावा राज्य सरकार का अपना अलग ऑडिट महकमा है। एजी द्वारा पूर मामले का तीन से पांच फीसदी ही टेस्ट चेक ऑडिट किया जाता है। इसीलिए राज्य सरकार में ऑडिट कंट्रेलर के अधीन एक अलग निदेशालय बना है। इसे सहकारिता और कार्य प्रमंडलों को छोड़कर राज्य सरकार के सभी कार्यालयोंे का विस्तृत ऑडिट करना है। अमूमन तीन साल पर कार्यालयों के ऑडिट का प्रावधान है। लेकिन गत दस वर्ष से 25 विभागों का ऑडिट नहीं हुआ है।ड्ढr घपले-घोटाले की चर्चा आम रहने के दौर में राज्य सरकार को अपनी नियंत्री इकाई से रिपोर्ट नहीं मिल रही है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कुछ तो कमी है, लेकिन इस कमी के नाम पर अधिकांश कार्यालयों का ऑडिट ही नहीं होता है।ड्ढr सूत्रों का कहना है कि ऑडिट सूची में चर्चित कार्यालयों का नाम छोड़ दिया जाता है। ऑडिट नहीं करने में भी कई तरह का खेल होता है। जहां आॉडिट होता है, उसमें अधिकांश जगहों से गड़बड़ियों के बड़े मामले उाागर नहीं होते हैं। सौ में से करीब 60 ऑडिटर 15 साल से एक ही जगह पर जमे हैं। इसमें कई पावर पाकेट बन गये हैं, जो स्थानांतरण की कोशिश सफल नहीं होने देते। तीन साल पर डिवीजन बदलने का नियम है। राज्य में रांची, हाारीबाग और दुमको तीन प्रमंडल हैं। एक ही स्थान पर लगातार बने रहने के पीछे भी कई राज बताये जाते हैं।

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