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एमओयू के बाद भी पावर प्लांट के नहीं आसार

विगत छह साल में दर्जन भर एमओयू के बाद भी राज्य में एक भी पावर प्लांट नहीं लग पाया है। 42 हाार मेगावाट के लिए विश्व प्रसिद्ध कई कंपनियों के साथ राज्य सरकार ने समझौता किया है, लेकिन एक भी प्लांट स्थापित नहीं हो पाया। स्थिति यह है कि कई कंपनियों की आधारभूत संरचना भी तैयार नहीं हो पायी है। जमीन, कोल ब्लॉक आवंटन और पानी के साथ पावर की समस्या यथावत है। पावर प्लांट लगाने के लिए निजी कंपनियों को आवश्यक सुविधाओं के लिए एड़ी-चोटी एक करनी पड़ रही है।ड्ढr जिन कंपनियों ने वर्ष 2011 तक पावर प्लांट से बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, उनके मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है। लातेहार में एस्सार ग्रुप ने दो हजार पावर प्लांट लगाने के लिए एमओयू किया है। लक्ष्य वर्ष-2011 है। इस कंपनी को पहली बार सबसे बड़ा कोल ब्लॉक भी मिला है। लेकिन अन्य सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मित्तल का भी पावर प्रोजेक्ट अधर में है। 2012 में मित्तल ने झारखंड में पावर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। लेकिन अब तक प्लांट नहीं लग सका है। जमीन और कोयले का ब्लॉक नहीं मिल पाया है। राज्य में पावर प्लांट के लिए कुल 24 एमओयू हुए हैं। 42 हाार मेगावाट पर एक अरब 60 करोड़ का निवेश होगा।ड्ढr तिलैया में पावर प्लांट का निर्माण कार्य जारी है। इस प्लांट से भी अगले दो साल तक पावर जेनरशन की संभावना नहीं दिखती। वहीं कोडरमा में डीवीसी का पावर प्लांट लगभग तैयार है। यहां से इस वर्ष के जून महीने तक एक हाार मेगावाट पावर का जेनरशन होगा। इसके अलावा किसी भी कंपनी के पास पावर प्लांट के कोई तैयारी नहीं है।

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