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परीक्षक बाहर, अंदर प्रैक्िटकल पूरा

प्रयोगशाला धूल से पटी थी। केमिकल की बोतलें बहुत गंदी थीं। एक कोने में कबाड़ तो दूसरे में टूटी-फूटे फर्नीचर का ढेर। दीवारों व छतों पर मकड़ी का जाल था। कुछ बोतलों में केमिकल थे, कुछ खाली पड़ी थीं। प्रैक्िटकल परीक्षा के नाम पर लैब में बच्चे कबड्डी कर रहे थे। विद्यालय प्रशासन परीक्षक की खातिरदारी में लगा था। परीक्षक इससे खासे गदगद थे। वे प्रयोगशाला की जगह एक कमरे में चर्चाओं में मशगूल थे। छात्रों को परीक्षक दिखाई नहीं दिए और यूपी बोर्ड की प्रैक्िटकल परीक्षा हो गई है। प्रैक्िटकल परीक्षा का यह हाल मंगलवार को सीतापुर रोड स्थित शिया इण्टर कॉलेज मे दिखाई पड़ा।ड्ढr राजधानी में इण्टरमीडिएट की प्रैक्िटकल परीक्षाएँ शुरू हो गई हैं। मंगलवार को शिया इण्टर कॉलेज में केमेस्ट्री की प्रयोगात्मक परीक्षा थी। परीक्षक के तौर पर बोर्ड ने इलाहाबाद के एक विद्यालय के शिक्षक लल्लन यादव को यहाँ भेजा था। यह संवावददाता जब विद्यालय पहुँचा तो दोनों प्रयोगशालाओं में न शिक्षक थे न परीक्षक। एक कर्मचारी से शिक्षक के बारे में पूछा गया तो उसने सामने कमरे की तरफ इशारा किया। इस बीच कमरे से कॉलेज के केमेस्ट्री के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. फिरो बाहर आ गए। आते ही वे लैब में घुसे और बच्चों को डपटकर शान्त कराया। परीक्षक लल्लन यादव के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि पास के एक कमरे में बैठे हैं। अन्दर कमरे में उनकी खातिरदारी चल रही थी। श्री यादव ने कहा कि बच्चे अपना काम कर रहे हैें। सब कुछ ठीक है। छात्रों का काम एक प्रयोगशाला से चल जाता है। इसीलिए दूसरी नहीं खोली गई। दूसरी को परीक्षा के समय ही खोला जाता है। इसीलिए वह गंदी है। अन्दर छात्रों से बात करने पर पता चला कि उन्होंने अभी तक परीक्षक को देखा ही नहीं। विद्यालय के शिक्षक ही लैब में आए थे। कौन परीक्षक है वे नहीं जानते। इसी तरह पार्किंग के पास खड़े पहले बैच के छात्रों ने भी कहा कि उन्होंने परीक्षक को नहीं देखा। सूत्र बताते हैं कि बोर्ड से आने वाले परीक्षक एक कमरे में बैठकर छात्रों को नम्बर दे देते हैं। वे न तो प्रैक्िटकल देखते हैं और न ही छात्रों से सवाल-ावाब करते हैं।

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