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दो टूक

नए मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला जब गुरुवार को अपना वोट डालने पोलिंग बूथ पहुंचे तो उन्हें झटका लगा। वोटर लिस्ट में उनका नाम ही नहीं था। वे पप्पू होते-होते रह गए। कहने वालों ने परिहास में कहा कि चावला के पूर्व बॉस जाते-ााते उनसे यह अंतिम मीठा बदला ले गए। बहरहाल घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पता चलता है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें सिस्टम को पूरी तरह नहीं बदल पाईं हैं। इंसानी लापरवाहियों और शरारतों की भूमिका जस की तस है। वैसे इस घटना का एक अच्छा पहलू भी है। एक दिन के लिए ही सही, मुख्य चुनाव आयुक्त ने आम वोटर के दर्द का स्वाद तो चखा। दिल्ली-एनसीआर के हाारों वोटरों की तरह उन्हें भी पता चला होगा लिस्ट में नाम न मिलने पर कैसी कोफ्त होती है।

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